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क्रांति यात्रा के सहारे ताकत जुटाएगी भाकियू, पहली बार आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार 

Sun, 23 Sep 2018 06:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हाथों में डंडे लेकर पंचायत में शामिल होने जाते भाकियू कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला
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भाकियू किसान क्रांति यात्रा के सहारे संगठन की ताकत भी जुटाएगी। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में भाकियू ने देश में कई बड़े आंदोलनों के सहारे केंद्र और प्रदेश सरकार की जड़ें हिलाई थी। उनके देहावसान के सात वर्ष बाद भाकियू पहली बार देश के किसानों के साथ मिल कर दिल्ली के किसान घाट पर अपना पुराना तेवर पाने की कोशिश करेगी। यही वजह है कि पदयात्रा में कई संगठनों को आमंत्रित किया गया है। 

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शामली के करमूखेड़ी धरने से वर्ष 1987 में भाकियू देश की सुर्खियों में आई थी। ढाई दशक तक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने सरकारों की नीतियों और किसानों के हकों के लिए कई बड़े आंदोलन किए। मेरठ कमिश्नरी पर 44 दिवसीय धरना, मुरादाबाद के रजबपुर में 110 दिन का आंदोलन कर उन्होंने किसान शक्ति की एकजुटता दिखा दी थी।

उन्हें राष्ट्रीय ख्याति वर्ष 1988 में वोट क्लब दिल्ली के धरने से मिली। भोपा गंग नहर पर मुस्लिम बेटी नईमा को इंसाफ दिलाने के लिए 39 दिन तक धरने पर बैठे चौधरी टिकैत ने भाकियू आंदोलन से हिंदू और मुसलमानों को एक मंच पर ला खड़ा किया था।

सौहार्द के हिमायती टिकैत के 15 मई 2011 में देहावसान के बाद से भाकियू की ताकत दरकने लगी थी। संगठन बिखरने लगा। दंगे ने भी भाकियू को क्षति पहुंचाई। टिकैत के खास सिपहसलार गुलाम मौहम्मद जौला ने भारतीय किसान मजदूर संगठन बना लिया, जबकि  चरथावल क्षेत्र में ठाकुर पूरण सिंह ने भारतीय किसान संगठन का अलग स्वरूप खड़ा कर लिया। भाकियू (भानू) और भाकियू अंबावत जैसे संगठन भी किसानों के संघर्ष को आगे आए। ऐसे में भाकियू टिकैत को अपने वजूद और शक्ति को बनाए रखने के लिए चुनौती मिली। 
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बाबा टिकैत के जाने के बाद भाकियू ने सिवाया टोल प्लाजा पर 37 दिन का धरना दिया। लखनऊ में प्रदर्शन किए, मगर कोई देशव्यापी आंदोलन नहीं कर पाई। भाकियू संस्थापक चौधरी टिकैत के बाद पहली बार संगठन इतने बड़े स्तर पर किसान क्रांति यात्रा निकाल रहा है।

भाकियू के प्रेस प्रवक्ता एवं कृषक समृद्धि आयोग के सदस्य धर्मेंद्र मलिक कहते हैं कि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने जिन मूल्यों के साथ किसानों के लिए संघर्ष किया, भाकियू ने उन्हीं उद्देश्यों को लेकर देश भर के किसानों को पदयात्रा में न्योता दिया है। 

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