संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में मुनि भावभूषण महाराज के सानिध्य में आयोजित आषाढ़ अष्टान्हिका महापर्व के चौथे दिन शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री 1008 नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना की तथा धर्मलाभ अर्जित किया।
नंदीश्वरद्वीप जिनालय में जाप्य अनुष्ठान के बाद भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया गया। शांतिधारा सुषमा जैन, मनीष जैन, आशीष जैन, सीमा जैन, शुभम जैन, अदिति, राकेश, सरिता जैन, आदिश जैन, कुसुम जैन, अंकित जैन और सतेंद्र जैन आदि श्रद्धालुओं ने की। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने सभी पात्रों का मंगल तिलक एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। पंडित आशीष जैन शास्त्री ने शांतिधारा के महामंत्रों का उच्चारण कराया।
मुनि भावभूषण महाराज ने नंदीश्वरद्वीप की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नंदीश्वरद्वीप एक दिव्य एवं अलौकिक द्वीप है, जहां अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर देवगण स्वयं भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
मुनिश्री ने प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि विद्याधर राजा ने मुनिराज से नंदीश्वरद्वीप की महिमा सुनकर वहां जाने का संकल्प लिया। अपनी विद्या के प्रभाव से विमान द्वारा प्रस्थान करने पर उसका विमान मानुषोत्तर पर्वत से टकरा गया और उसके शुभ भावों के कारण वह देवगति को प्राप्त हुआ। बाद उसे नंदीश्वरद्वीप में भगवान के अकृत्रिम चैत्यालयों के दर्शन का सौभाग्य मिला। लौटकर उसने अपनी पत्नी को वहां का दिव्य स्वरूप बताया और स्वीकार किया कि नंदीश्वरद्वीप में केवल देव ही पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मुनिश्री ने कहा कि अष्टान्हिका महापर्व में कृत्रिम नंदीश्वरद्वीप जिनालय में किए जाने वाले विधान और आराधना का पुण्य भी साधकों को उत्तम भव और देवगति की ओर अग्रसर करता है।
संगीतमय महाआरती एवं भक्तामर पाठ में 48 दीप प्रज्वलित कर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से आराधना की। इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर- फोटो : AMAR UJALA