उन्होंने कहा कि आज किसानों के आंदोलन का 21वां दिन हो चुके हैं, किसान सर्दी के मौसम में खुले आसमान के नीचे पड़ें हैं, लेकिन सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों में टकराव पैदा हो। किसान टकराव नहीं चाहते, वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। सरकार इस मामले को मामूली मानकर चल रहा है जबकि यह गंभीर मामला है।
कहा कि बातचीत से समस्या का हल निकलना चाहिए। आंदोलन में शामिल किसी भी संगठन को भले ही बातचीत के लिए बुलाया जाए लेकिन मसला हल होना चाहिए। सभी किसान भले ही अलग अलग संगठनों से आते हैं लेकिन सभी की मंजिल एक है।
बता दें कि किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस रात भर किसान नेताओं के संपर्क में रही। मुजफ्फरनगर में एसएसपी ने सिसौली पहुंचकर चौधरी नरेश टिकैत से दिल्ली न जाने का आग्रह किया लेकिन नरेश टिकैत नहीं माने।
मेरठ-सहारनपुर, बागपत व शामली सभी जिलों में किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन मुस्तैद है। बागपत में हरियाणा के किसानों की ईस्टर्न पेरिफेरल वे पर पहुंचने की सूचना पर पुलिस बल तैनात किया गया है।