राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की तलाश करने के लिए ही किसान पदयात्रा करते हुए दिल्ली जा रहे हैं। किसानों ने भाजपा को वोट देकर सत्ता सौंपी थी। लेकिन उन्होंने किसानों का काम नहीं किया। पिछले साढ़े चार साल से देश के किसान सरकार को ढूंढ रहे हैं। अब पता लगा है कि सरकार दिल्ली में एक गोल सी बिल्डिंग (संसद) में बैठती है। उस गोल बिल्डिंग का घेराव करने जाएंगे।
टिकैत ने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं किया। डेढ़ गुणा एमएसपी देने का झूठा वादा किया जा रहा है। किसी भी मंडी में एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही है। किसानों की बिजली की दरें दोगुना कर दी हैं। दस साल पुराने ट्रैक्टरों पर प्रतिबंध लगा दिया है। क्या इस देश में किसानों को जीने का अधिकार नहीं है।
सत्ता में बैठे लोग मलाई खाकर किसानों को भूल जाते हैं। ये किसान पदयात्रा अहंकारी और तानाशाह सरकार का गुरूर तोड़ने के लिए निकाली जा रही है। टिकैत ने कहा कि यात्रा में किसानों का इतना समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं थी लेकिन इतनी भीड़ से साफ दिख रहा है कि किसान कितना बेहाल है और सरकार से कितना खफा है। दिल्ली में यूपी के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के किसान सरकार से अपना हक मांगेंगे।
सरकार की किसान विरोधी नीतियों से देश के किसान बर्बाद हो चुके हैं। हक हासिल करने के लिए ही यह किसान क्रांति पदयात्रा निकाली जा रही है। यह बातें भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने टोल प्लाजा स्थित भगवती कालेज में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव पूर्व किसानों से स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करके फसल का दाम डेढ़ गुणा देने का वादा किया था। अब 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की बात कही जा रही है। आज खेती घाटे का सौदा हो गई है।
पुराने लोग किसी तरह अपनी गुजर-बसर कर रहे है, लेकिन युवा इससे मुंह मोड़ते जा रहे हैं। जब तक सरकार किसानों से किए वादे पूरे नहीं करेगी तब तक देश के किसान खुशहाल नहीं होंगे। बाबा टिकैत के बाद भाकियू के कमजोर होने के सवाल पर बोले कि उनका दौर अलग था। तब न तो किसान इस तरह जातियों में बटा था और न ही इतनी ज्यादा समस्या थी। राजनीतिक दलों ने किसानों को फायदे के लिए जातियों और धर्म में बांट दिया है।
भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने कहा कि किसान सरकार बनानी भी जानते हैं और सत्ता से उतारना भी। भाजपा ने चुनाव पूर्व किसानों से तमाम वादे करके वोट हासिल किया था। लेकिन साढ़े चार साल में एक भी वादा पूरा नहीं किया।
प्रेस वार्ता कर सिंह ने कहा कि सरकारों की किसान विरोधी नीतियों के चलते 1997 से लेकर आज तक देश के 3 लाख 20 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं और देश के कृषि मंत्री कहते हैं कि नपुंसकता के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इतना कहने के बाद भी उन्हें नहीं हटाया गया। किसान आंदोलन में दूसरे संगठनों को नहीं जोड़ने के सवाल पर कहा कि ये देश 135 करोड़ लोगों का है। सिंह ने कहा कि किसानों के बच्चे खेती छोड़कर शहर में रोजगार ढूंढने जा रहे हैं।
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