- विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। मवाना तहसील के नगला गोसाई गांव में रहने वाले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया को सरकार ने आसान बना दिया है। अब इन परिवारों को मात्र एक रुपये वार्षिक लीज रेंट पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए लीज रेंट और पट्टे के निर्धारित प्रारूप पर भी अपनी मुहर लगा दी है।
मवाना तहसील के गांव नगला गोसाई में लंबे समय से रह रहे पूर्वी पाकिस्तान से आए विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए 29 जनवरी को निर्णय लिया था। इसके तहत 99 परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के गांव भैंसाया और ताजपुर तरसौली में बसाया जाना है। हालांकि, पूर्व में जारी आदेश में लीज रेंट और पट्टे के प्रारूप का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था जिससे प्रक्रिया अधूरी थी।
अब सरकार ने इस कमी को दूर करते हुए 63 पात्र विस्थापित परिवारों के लिए लीज रेंट एक रुपये निर्धारित कर दिया है। साथ ही पट्टा देने के लिए एक मानक प्रारूप भी तय कर दिया गया है, जिससे पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद है।
इस संबंध में कानपुर देहात के जिलाधिकारी ने 27 मार्च 2026 को आदेश जारी किया था, जिसे बाद में कैबिनेट ने कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान कर दी।
सरकार के इस निर्णय से मवाना तहसील क्षेत्र में वर्षों से अस्थायी रूप से रह रहे परिवारों को कानपुर में स्थायी आवास का अधिकार मिल सकेगा और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
पूर्वी पाकिस्तान से आए थे भारत
यह परिवार दशकों पहले पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर यहां आकर बसे थे और लंबे समय से स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले को उनके लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब प्रशासन जल्द ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी में जुट गया है।
नगला गोसाई गांव की गालियां स्रोत संवाद
नगला गोसाई गांव की गालियां स्रोत संवाद