बीस साल से ज्यादा चली जमीन की जंग किसानों ने तो जीत ली। लेकिन इस जीत का बड़ा लाभ मेरठ विकास प्राधिकरण को भी होने जा रहा है। एमडीए ने इस जमीन का अधिग्रहण करने के बावजूद सीलिंग की जमीन कहकर किसानों को मुआवजा नहीं दिया। किसानों ने भी कब्जा नहीं दिया और शासन में लड़े। अब शासन ने फैसला सुनाया है कि अरबन सीलिंग की अधिग्रहीत एक लाख 90 हजार वर्ग मीटर जमीन का मुआवजा किसानों को ही दिया जाएगा। एमडीए में इस जमीन के चिन्हीकरण का काम शुरू हो गया है।
यह है सीलिंग की जमीन
सीलिंग एक्ट के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति के नाम 5.073 हेक्टेयर यानी लगभग 12.5 एकड़ से ज्यादा जमीन है तो उससे ज्यादा जमीन को सरकार के नाम कर दिया जाएगा। यानी किसी को एक नाम पर इससे ज्यादा कृषि भूमि रखने का अधिकार नहीं। इससे ज्यादा जमीन सीलिंग में आ जाएगी। नगरीय क्षेत्र में इसे अरबन सीलिंग और ग्रामीण क्षेत्र में रूरल सीलिंग जमीन कहा गया है। यह जमीन सरकार के नाम तो होे जाती है। लेकिन इस पर खेती मूल किसान ही करता रहता है।
एमडीए ने अधिग्रहीत की जमीन
एमडीए ने वर्ष 1987 से अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की थी। समय-समय पर जमीन का अधिग्रहण विभिन्न योजनाआें के लिए किया गया। एमडीए ने योजनाओं के बीच में आ रही अरबन सीलिंग जमीन का भी अधिग्रहण किया। चूंकि ये नंबर अरबन सीलिंग के थे तो उनका मुआवजा किसानों को नहीं दिया गया। ऐसी जमीन का पैसा सरकार को भी उस सूरत में दिया जाता है, जब सरकार पैसा मांगे। सरकार ने पैसा मांगा नहीं और एमडीए ने सरकार के खाते में इसका पैसा जमा नहीं किया।
अब किसान जीते
तभी से किसान इस बाबत लड़ाई लड़ रहे थे। शताब्दी नगर योजना के किसान इसे लेकर शासन में गए थे और अब किसान यह जंग जीत गए हैं। शासन ने उनकी बात मानते हुए निर्देश दिए हैं कि यहां की अरबन सीलिंग की एक लाख 90 हजार वर्ग मीटर जमीन का मुआवजा दिया जाए। इसका मुआवजा किसानों को ही देने को कहा गया है। कुल 46.95 एकड़ इस जमीन के मुआवजे का हिसाब-किताब एमडीए ने शुरू कर दिया है। हालांकि सभी योजनाओं में इस तरह की जमीन है पर वेदव्यासपुरी में सबसे ज्यादा ऐसी जमीन का अधिग्रहण हुआ था।
एमडीए की भी बल्ले बल्ले
यह ऐसा आदेश है जिससे एमडीए की भी बल्ले बल्ले होने वाली है। दरअसल, इस जमीन का मुआवजा न मिलने के कारण अधिकतर जमीन को किसानों ने छोड़ा ही नहीं था। अब जब आदेश आ गया है तो मुआवजा देने के बाद एमडीए इस जमीन पर कब्जा भी लेगा। डेवलपमेंट में भी कटौती होने के बाद यदि दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का रेट लगाया जाए तो एमडीए को इस जमीन से सौ करोड़ रुपये की आय हो सकती है। हालांकि यहां वर्तमान बाजार रेट इससे भी ज्यादा है। यही कारण है कि एमडीए ने इस जमीन का चिन्हीकरण तेजी से शुरू कराया है। साथ ही इस आदेश की भी पुष्टि शासन से कराई जा रही है।