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बीमार सिस्टम से दम तोड़ता स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार

Sat, 28 Jan 2017 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 जिले में 43 स्वास्थ्य केंद्र हैं तो 12 ब्लॉकों में 212 चिकित्सक और करीब 55 फार्मासिस्ट तैनात हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग का सिस्टम इस कदर बीमार है कि अच्छी-खासी संख्या होने के बावजूद इन स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार दम तोड़ रहा है। खुद सीएमओ तीन माह से इन केंद्रों का औचक निरीक्षण करा रहे हैं। जहां इनकी बदहाली की पोल खुल रही है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब सिफर है। विभाग किसी भी चिकित्सक के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि देने या फिर शासन को डीओ लिखने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाया है।
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बुलंदशहर मेरठ से आगे
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अक्सर कहते मिल जाएंगे कि हमारे पास चिकित्सकों की कमी है। लेकिन यह दावे झूठे हैं। क्योंकि मेरठ मंडल में सबसे ज्यादा चिकित्सकों की संख्या मेरठ जिले में है। 12 ब्लॉक वाले इस जिले में जहां 212 चिकित्सक हैं, तो वहीं 19 ब्लॉक वाले बुलंदशहर में महज 159 चिकित्सक हैं। ऐसे समय में जब बुलंदशहर में चिकित्सक मेरठ की तुलना में कम हैं तो ओपीडी, भर्ती मरीज और डिलीवरी की संख्या मेरठ के मुकाबले करीब 40 फीसदी अधिक है। टीकाकरण से लेकर मिशन फ्लैक्सीपूल के मामले में बुलंदशहर मेरठ से आगे है।

इलाज चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के हवाले
निरीक्षण में साफ हो चुका है कि चिकित्सकों और फार्मासिस्ट के गायब रहने पर चतुर्थ श्रेणी स्टाफ मरीजों का उपचार करता मिला। एडिशनल पीएचसी के एक वार्ड ब्वॉय ने कहा भी कि डॉक्टर साहब ने हमें लिखकर दे रखा है कि किस मर्ज में कौन सी दवा दी जाए। उसी से इलाज कर देते हैं। ऐसे हालात में समझा जा सकता है कि स्वास्थ्य केंद्रों का क्या हाल होगा।
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निरीक्षण महज खानापूर्ति
हाईकोर्ट के सख्त होने पर मुख्यालय स्वास्थ्य केंद्रों की हालत सुधारने के नाम पर निरीक्षण कराता है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर खेल कर दिया जाता है। डीएम ने दो माह पहले अपने स्तर से स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कराया था तो काफी लापरवाही सामने आई थी। डीएम के आदेश के बावजूद सीएमओ कार्यालय ने चिकित्सक व अन्य स्टाफ की उस माह की सैलरी नहीं काटी थी। मामला ट्रेजरी में पकड़े जाने के बाद खुला था। तीन माह के निरीक्षण में सिर्फ भावनपुर सीएचसी प्रभारी को हटाया गया, जबकि हालात दूसरी जगहों के भी खराब थे। खरखौदा सीएचसी प्रभारी स्वयं गाजियाबाद से नौकरी कर रहे थे, निरीक्षण के दौरान यह बात पकड़ में भी आई। लेकिन मामला तनख्वाह काटने तक ही सिमटकर रह गया। मौजूद समय में छुट्टियों पर रोक है। लेकिन चिकित्सक एप्लीकेशन लगाकर स्वास्थ्य केंद्रों से गायब हैं। फिर भी विभाग कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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स्वास्थ्य केंद्र
एडिशनल पीएची - 31  
सीएचसी   - 12
कुल - 43

चिकित्सक
एलोपैथी - 155  
डेंटल  - 2
आयुर्वेदिक - 15
संविदा पर - 40
कुल - 212
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