मेरठ। शास्त्रीनगर में हुए सत्संग में स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने देवर्षि नारद कथा का उल्लेख किया। कथा में बताया गया कि नारद जी की कठोर तपस्या से चिंतित होकर इंद्र ने कामदेव, और ऋतु बसंत के माध्यम से तपस्या भंग करने का प्रयास किया। यह प्रसंग बताते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने लक्ष्य से विचलित करने वाली बाधाओं से सदैव सचेत रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्संग के बिना विवेक नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि सत्संग से दुष्ट व्यक्ति भी सुधर सकते हैं। इसलिए सही संगति का चयन अत्यंत सावधानी से करना चाहिए। कार्यक्रम में रामायण पूजन सुनील दत्त शर्मा और व्यास पूजन भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा एवं इंजीनियर मनोज गर्ग ने परिवार सहित किया। व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, हर्ष गोयल, विनय गुप्ता एवं अंकुर गोयल सहित अन्य मौजूद रहे।