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Meerut News: रहें सावधान...बदलते मौसम में निमोनिया कर सकता है हमला

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रहें सावधान...बदलते मौसम में निमोनिया कर सकता है हमला
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मेरठ। इस बदलते मौसम में निमोनिया से सावधान रहने की जरूरत है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज 500 से ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग पहुंच रहे हैं, जिनमें से 50 से अधिक को निमोनिया निकल रहा है। जैसे जैसे ठंड और बढ़ेगी, खतरा और बढ़ेगा।
फेफड़ों में सूजन या पानी भर जाने की स्थिति को निमोनिया कहते हैं। यह एक गंभीर संक्रमण है, जो घातक हो सकता है। फिजिशियन डॉ वीके बिंद्रा ने बताया कि सबसे ज्यादा होने वाली निमोनिया यानी बैक्टीरियल निमोनिया का मुख्य इलाज एंटीबायोटिक्स है। यह बीमारी का कारण बने हुए जीवाणु पर कार्य करता है। अधिकतर मरीज ओपीडी द्वारा इलाज करा सकते हैं, लेकिन यदि यह बीमारी किसी अन्य बीमारी के साथ जुड़ी हुई है, 65 वर्ष के ऊपर की उम्र के व्यक्ति को हुई है या रोगी गम्भीर रूप से बीमार है, तो अक्सर अस्पताल में भर्ती करके इलाज कराना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त तरल पदार्थ का सेवन, आक्सीजन (अगर सांस तेज फूल रही है), नेबुलाइजेशन अन्य उपाय हैं।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ अशोक तालियान ने बताया कि कोविड निमोनिया की तीव्रता नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर से आक्सीजन का स्तर नापना एक सरल उपाय है। यदि इसकी रीडिंग 94 से कम है तो गम्भीर तथा 90 से कम है तो अति गम्भीर निमोनिया को दर्शाती है।
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ठंड बढ़ रही है। ऐसे में बच्चों में निमोनिया होने की शिकायत मिल रही है। ओपीडी में भी रोजाना निमोनिया से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। बच्चों को निमोनिया से बचाव के लिए उनका सर्दी से बचाव रखें।
डॉ. नवरत्न, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में होने वाली मौतों में निमोनिया प्रमुख कारण है। इस दिशा में सरकार ने निमोनिया से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण में पीसीवी टीके को शामिल किया है। यह टीका निमोनिया से बचाव में काफ़ी असरदार है। अपने बच्चों को टीकाकरण अवश्य करवाएं।
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- अखिलेश मोहन, सीएमओ
निमोनिया के प्रमुख लक्षण : तेज बुखार, खांसी एवं बलगम (कई बार खून के छीटें भी हो सकते है), सीने में दर्द, सांस फूलना एवं कुछ मरीजों में दस्त, मतली और उल्टी, व्यवहार में परिवर्तन जैसे मतिभ्रम, चक्कर, भूख न लगना, जोड़ों और मांशपेशियों में दर्द, सर्दी लगकर शरीर ठंडा पड़ जाना, सिरदर्द, चमड़ी का नीला पड़ना आदि।
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