- दशमेश नगर में चल रही श्रीराम कथा में भक्ति और प्रेम का संदेश दिया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दशमेश नगर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास जनार्दन तिवारी ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव एवं बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीराम ने लीलाओं के माध्यम से प्रेम और प्रभु भक्ति का संदेश दिया। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु ने सभी को श्रेष्ठ कार्यों के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ कार्यों में सभी को सहयोगी बनना चाहिए, बाधक नहीं।
कथा व्यास ने बताया कि प्रभु के जन्म के आनंद में सूर्य नारायण भी एक माह तक अस्त नहीं हुए और जहां थे, वहीं स्थिर हो गए। उन्होंने भगवान श्रीराम एवं उनके भाइयों के नामकरण संस्कार का प्रसंग भी सुनाया। कथा व्यास ने बताया कि विश्व के भरण पोषण एवं तृप्ति के प्रतीक होने के कारण दूसरे पुत्र का नाम भरत रखा गया। जिनके स्मरण मात्र से शत्रुओं का नाश होता है। उनका नाम शत्रुघ्न रखा गया और जो श्रीराम के परम प्रिय हैं और जिनके जीवन का आधार ही श्रीराम हैं, उनका नाम लक्ष्मण रखा गया।
चारों भाइयों के गुरु वशिष्ठ के आश्रम में विद्याध्ययन के लिए जाने और ऋषि विश्वामित्र के अयोध्या पहुंचकर यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को मांगने के प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि मारीच और सुबाहु जैसे राक्षस यज्ञ में विघ्न डालते थे तब श्रीराम ने उनका संहार किया। इस प्रसंग से सीख लेनी चाहिए कि कभी भी श्रेष्ठ कार्यों में बाधक न बनें अन्यथा प्रभु कठोर दंड देते हैं।