जिटौली रेलवे ओवरब्रिज पर काफी संख्या में नट-बोल्ट गायब होने का खुलासा होने पर रेलवे और प्रशासन में हड़कंप मचा है। शनिवार सुबह रेलवे की बड़ोदरा से आई टीम ने पुल की जांच कर इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी। वहीं, ओवरब्रिज पर हैवी ट्रैफिक बंद रहा। जिसके चलते एनएच-58 पर भीषण जाम की स्थिति रही।
दरअसल शुक्रवार शाम रेलवे ओवरब्रिज 107-ए के लोअर गार्डर से 20 से अधिक और अपर लाइन के एक गार्डर के करीब 50 से ज्यादा नट बोल्ट गायब मिले थे। शनिवार को रेलवे और प्रशासन के अफसरों के अलावा एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर ब्रिजेश सिंह मौके पर रहे। टीम ने आरओबी के गायब नट बोल्टों को लगाने का कार्य शुरू किया। लेकिन दिल्ली से बोल्ट कसने की गलत मशीन आने पर काम रुक गया। शाम को दूसरी मशीन आने पर काम शुरू हुआ।
वहीं, रेलवे विभाग बड़ोदरा से आए अभियंता ओपी चेतीवाल व रेलवे सहायक मंडल इंजीनियर राकेश शर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की। शनिवार रात तक भारी वाहनों को आरओबी से नहीं गुजरने दिया गया, जिसके कारण मोदीपुरम में भीषण जाम लग गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर भारी वाहनों को रुड़की रोड़ से निकाला। वहीं, ओवरब्रिज के नट बोल्ट लगाने का काम रविवार को भी जारी रहेगा।
एक-दूसरे के सिर ठीकरा
मोदीपुरम। आरओबी से नट बोल्ट गायब होने का ठीकरा एनएचएआई और रेलवे विभाग एक-दूसरे पर फोड़ रहे हैं। बताया गया है कि रेलवे की जांच में पाया गया है कि जिन जगहों से नट बोल्ट गायब हैं, वहां का पेंट बिल्कुल भी नही हटा है और न ही किसी तरह के निशान हैं। ऐसे में यदि बोल्ट लगाए या खोले जाते हैं तो गार्डर पर निशान होने चाहिए थे। लेकिन निशान नही हैं और कलर ठीक है। जिससे यह भी चर्चा है कि एनएएचआई द्वारा फ्लाईओवर निर्माण के दौरान बोल्ट ही नहीं लगाए गए। क्योंकि ये बोल्ट मशीन से लगते हैं और मशीन से ही खुलते हैं। वहीं, एनएएचआई के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे को पुल पूरी तरह से तैयार करने के बाद हैंडओवर किया गया था। नट नहीं लगाने की बात पूरी तरह से गलत है। लापरवाही रेलवे की है। हालांकि इस तरह के आरोप कोई भी अधिकारी खुलकर लगाने से कतरा रहा है। फिलहाल सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।