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बनते ही टूटनी शुरू हो गई सवा करोड़ की सड़क

Mon, 07 May 2018 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेट्रो प्लाजा से भुमियापुल तक एक माह पहले सवा करोड़ की लागत से बनी सड़क टूटनी शुरू हो गई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही यह सड़क पहले की तरह गड्ढों में तब्दील हो जाएगी।
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मेट्रो प्लाजा से भुमियापुल जाने वाला मार्ग हापुड़ रोड-गढ़ रोड और दिल्ली रोड़ को जोड़ता है। इस मार्ग से  दिल्ली रोड से हापुड़ अडड चौराहा तक जाने वाले सभी वाहन गुजरते हैं। दो साल से सड़क पूरी तरह टूटी रही। ऐसे में पीडब्लूडी ने यहां डेंस की सड़क बनाने और सड़क किनारे आईएसआई मार्का टायल्स लगाने का प्रपोजल तैयार किया। एक माह पहले ही सड़क बनाई गई, लेकिन अब यह फिर से टूटने लगी है। इसका कारण कारण पानी की पाइप लाइन के लीकेज को माना जा रहा है। साथ ही इसके लिए जल निगम, नगर निगम प्रशासन की लापरवाही बताई जा रही है। वहीं  इस मार्ग पर रात के समय भारी वाहन गुजरते हैं, जिससे सड़क की और हालत खराब हो रही है।

हम कई बार नगर निगम को फोन पर और पत्र के माध्यम से टूटी पानी की पाइप लाइन के संबंध में अवगत करा चुके हैं। लेकिन कोई सुनने को ही तैयार नहीं है। पानी ने सड़क को भारी नुकसान हो रहा है। प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्लूडी
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नियानुसार लगने लगी टायल्स
मेट्रो प्लाजा से भुमिया पुल तक सड़क किनारे लगाई जा रहीं टायल्स में जमकर खेल हुआ। इसका खुलासा होते ही शनिवार को पीडब्लूडी का ठेकेदार हरकत में नजर आया। अब टायल्स के नीचे पत्थर, डस्ट और बालू रेत का मिश्रण डाला जाने लगा है। हालांकि पीडब्लूडी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचना गवारा नहीं समझा। बताया जा रहा है कि ठेकेदार भाजपा के एक बड़े नेता का करीबी है। इसलिए पीडब्लूडी के अधिकारी उसपर कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
मेट्रो प्लाजा से भुमिया पुल तक सड़क किनारे टायल्स लगाने का काम चल रहा है, लेकिन टायल्स को नियमों के विपरीत रेत पर लगाया जा रहा था। इस गड़बड़झाले का अमर उजाला ने शनिवार के अंक में खुलासा किया तो ठेकेदार ने ब्रह्मपुरी थाने के निकट चल रहे टायल्स लगाने के कार्य को कुछ ठीक करने का काम किया। शनिवार और रविवार को टायल्स के नीचे कुछ पत्थर, डस्ट और बालूरेत भी डाला जा रहा था। वहीं इससे पहले लगाई गई टायल्स जगह-जगह उखड़ी पड़ी हैं।

रेत पर लगी टायल्स का जिम्मेदार कौन
डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क किनारे बालू रेत और मिट्टी पर लगाई गई टायल्स के लिए आखिर कौन जिम्मेदार होगा। शनिवार को भी पीडब्लूडी के अधिकारी इस मुद्दे पर बात करने से बचते रहे। केवल शिकायत कर्ताओं से बातचीत करने पर अधिक बल दिया जाता रहा। जबकि अब तक लगायी गयी टायल्स में कम से कम पांच लाख रुपये का गोलमाल हो चुका है। यही नहीं इस मार्ग पर लगाई जा रही टायल्स आईएसआई मार्का नहीं हैं। ये किस कंपनी की टायल्स है इसको भी पीडब्लूडी के अधिकारी देखने को तैयार नहीं है।

प्रपोजल में सड़क की एक पटरी पर टायल्स लगाई जानी थी, लेकिन हम ठेकेदार से सड़क की दूसरी पटरी पर भी टायल्स लगवा रहे हैं। टायल्स के नीचे पत्थर भी डलवाना शुरू कर दिया है। हरेंद्र सिंह, जूनियर इंजीनियर पीडब्लूडी
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