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संतुलित उर्वरक प्रयोग से बढ़ेगी पैदावार : डॉ. राकेश तिवारी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हस्तिनापुर। कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में संतुलित उर्वरक प्रयोग पर किसान गोष्ठी हुई। इसमें किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि बिना परीक्षण के अंधाधुंध उर्वरक प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ती है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है।
प्रभारी डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि मिट्टी परीक्षण से गुणवत्ता सुधरेगी और फसल उत्पादन बढ़ेगा। संतुलित उर्वरक प्रयोग का मानक अनुपात 4:2:1 बताया गया। इसका अर्थ है चार किलो यूरिया, दो किलो फास्फोरस और एक किलो पोटाश का प्रयोग किया जाए। तिवारी ने चिंता जताई कि वर्तमान में अनुपात 25:5:1 तक पहुंच गया है। यह फसलों और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक उर्वरक दूसरे की पूर्ति नहीं कर सकता। सभी उर्वरकों का कार्य अलग-अलग होता है।
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फास्फोरस जड़ों के विकास में सहायक होता है। पोटाश पौधों को रोगों से लड़ने की क्षमता देता है। यह दानों की गुणवत्ता और चमक भी बढ़ाता है। फास्फोरस की अधिक मात्रा से सूक्ष्म पोषक तत्वों की सक्रियता प्रभावित होती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से संतुलित उर्वरक प्रयोग अपनाने की अपील की। उन्होंने नियमित रूप से मिट्टी परीक्षण कराने को कहा। इससे लागत कम होगी और बेहतर उत्पादन मिलेगा।
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