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बैठक में रिजेक्ट, मिनिट्स में पास हुआ प्रस्ताव

Tue, 30 Aug 2016 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग का अब एक बड़ा कारनामा सामने आया है। जिसमें जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) और सीएमओ कार्यालय ने पूर्व जिलाधिकारी की आंखों के सामने खेल कर दिया। तत्कालीन डीएम पंकज यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था, उसी प्रस्ताव को मिनिट्स में दर्ज कर पास करा लिया। वो भी जो प्रस्ताव शासनादेश के हिसाब से भी पास नहीं हो सकता है। मामला उस वक्त खुला, जब प्रस्ताव पास होने का हवाला देकर जिला क्षय रोग विभाग के तहत तैनात सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) ने परिवहन खर्च के लिए मासिक स्तर पर भुगतान करने को कहा।
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 सारा मामला जिला क्षय रोग विभाग के अधीन सेवारत 11 एसटीएस के परिवहन खर्च से जुड़ा है। जिसको लेकर बीते साल दिसंबर में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में प्रस्ताव रख दिया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि अभी तक इनके लिए मोटर साइकिल व अन्य वाहन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से बजट जारी नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में निजी वाहन का खर्च दिया जाना चाहिये। प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि सरकार निजी वाहन के लिए पेट्रोल व इत्यादि का खर्च नहीं देता है। सरकार द्वारा दो ही व्यवस्था की जाती है नंबर एक वाहन खरीद कर दिया जाये या फिर संबंधित विभाग को किराये पर वाहन लेने की अनुमति दी जाये।
 दिसंबर 2015 मेें जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार ने प्रस्ताव रखा था, जिसे तत्कालीन सीडीओ नवनीत सिंह चहल ने खारिज कर दिया। इसके बाद फरवरी के डीएचएस की मिनिट्स में सीएमओ कार्यालय की तरफ से प्रस्ताव को पास करा दिया गया। इत्तफाक की बात यह है कि जिलाधिकारी द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी कर दिया गया। क्योंकि मिनिट्स किसी भी बैठक में रखे गए प्रस्ताव को लेकर तैयार की जाती है और अक्सर जिलाधिकारी मान लेते हैं कि बैठक में जो निर्णय लिये गए होंगे वो ही मिनिट्स में लिखे जायेंगे। लेकिन यहां पर खेल हो गया।
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ऐसे हुआ खुलासा
मिनिट्स में धीरे से प्रस्ताव को रखकर पास करने के बाद एसटीएस की तरफ से जिला क्षय रोग अधिकारी को बिल भेजा और 4500 रुपये प्रति माह के हिसाब से परिवहन खर्च मांगा। जिस पर क्षय रोग अधिकारी ने कहा कि यह तो दिया ही नहीं जा सकता है। क्योंकि जिला स्वास्थ्य समिति से प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ है। जिस पर एसटीएस ने कहा प्रस्ताव पास हो गया। उन्होंने क्षय रोग अधिकारी को मिनिट्स भी दिखा दी। क्षय रोग अधिकारी सारे मामले को लेकर सीडीओ से मिले तो फाइलें खंगालने पर खुलासा हुआ कि डीपीएम इमरान खां के स्तर से खेल किया गया है। ऐसे में सीडीओ ने क्षय रोग अधिकारी को सलाह दी की वो परिवहन खर्च का कोई भुगतान ना करें। अगर लिखित में पूछा जाता है तो सारे मामले में अपनी रिपोर्ट लगाकर भेज दें।

क्यों दिया जाता है परिवदन खर्च
जिले में क्षय रोग विभाग की 18 ट्रीटमेंट यूनिट हैं। जहां पर टीबी की जांच के लिए सैंपल लिये जाते हैं। प्रत्येक यूनिट पर एक सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज तैनात है। जिनका काम सैंपल एकत्र करने के साथ ही जिला स्तर पर स्थापित सेंट्रल यूनिट तक पहुंचाना है। 18 एसटीएस में से 11 लोगों की नई ज्वाइनिंग बीते साल सितंबर में ही हुई है। ऐसे में नई लोगों के पास मोटर साइकिल नहीं है। जबकि पुराने लोगों के पास मोटर साइकिल है और उन्हें खर्च के तौर पर 45 हजार रुपये सालाना दिये जाते है। अब नए एसटीएस को उनके निजी वाहन पर ही खर्च दिलाये जाने का प्रस्ताव नियमों के विरुद्ध जाते हुए पास करा लिया गया है।
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