शहर में वायरल मरीजों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही है। हालात ये हैं कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बेड भी खाली नहीं हैं। अगर चिकित्सक किसी मरीज की सामान्य वायरल बताकर घर पर इलाज लेने की सलाह देते हैं, तब भी वह भर्ती होने के लिये अड़ जाता है। इसकी एक वजह यह भी है कि बुखार के 80 फीसदी केस में प्लेटलेट्स कम आ रही हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हर दिन भर्ती होने वाले वायरल मरीजों का औसत 75 से ज्यादा का है। उधर, सोमवार को हुई बारिश के बाद डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है।
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि 28 अगस्त को 121 मरीज इमरजेंसी में आए। इनमें से 92 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। इससे पहले 27 अगस्त को 84 और 26 अगस्त को 79 मरीजों को भर्ती किया गया। इन हालात में डेंगू के मरीजों के लिए आरक्षित वार्ड में भी मरीजों को भर्ती करना पड़ा। उधर, जनरल वार्ड में भी जगह नहीं है। एक बेड खाली होता है तो दूसरे को भर्ती कर लिया जाता है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के डेंगू वार्ड का भी यही हाल है। उधर, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर भी वायरल से पीड़ित हैं। उन्हें भाग्य श्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
300 से 400 सैंपल रोजाना
जिला अस्पताल की लैब में रोजाना 300 से 400 सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं। लैब के आंकड़ों पर गौर करें तो एक से 27 अगस्त के बीच मलेरिया के 1222 सैंपल लिए गए। इनमें से 30 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। विडाल के 1021 सैंपल लिए गए, जिसमें से 82 केस पॉजिटिव पाए गए हैं।
प्लेटलेट्स भी बनीं मुसीबत
पैथोलॉजी लैब का जिम्मा संभाल रहे डॉ. विक्रम का कहना है कि बुखार के 80 प्रतिशत केस में प्लेटलेट्स कम आ रही हैं। बुखार के 30 फीसदी ऐसे केस सामने आ रहे हैं, जिनमें प्लेटलेट्स 50 हजार से नीचे हैं। इससे साफ है कि वायरल में भी मरीज की प्लेटलेट्स गिर रही हैं।
बारिश ने बढ़ा दी चिंता
बारिश और उमस के बीच जहां डेंगू का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, बीते तीन दिन में डेंगू के एक भी नये केस की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, चिकनगुनिया अब भी सक्रिय है। मेडिकल कॉलेज स्थित माइक्रो बायोलॉजी विभाग ने सोमवार को चिकनगुनिया के तीन नए केस की पुष्टि की। इन हालातों के बीच स्वास्थ्य विभाग बेखबर बैठा है। जिले में अब तक डेंगू के 19 और चिकनगुनिया के सात मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग निजी लैबों में जांच करा रहे हैं, जिससे डेंगू और चिकनगुनिया के वास्तविक आंकड़ों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। सोमवार को बारिश के बाद डेंगू और चिकनगुनिया के केस बढ़ने का खतरा और बढ़ गया है।
एक-एक बेड पर दो-दो मरीज
डेंगू-चिकनगुनिया के डर से वायरल के मरीज भी अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में डेंगू के मरीजों के लिए बनाए गए वार्ड में भी वायरल के मरीजों को भर्ती करना पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिए सोमवार दोपहर दो भाइयों को बेड नंबर-19 पर एक साथ भर्ती किया गया।
इलाज के साथ करें आराम
चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया भी वायरल जैसा है। इसके इलाज में थोड़ी सतर्कता बरतने की जरूरत है। जरूरी है कि चिकित्सक के सुपर विजन में इलाज लें और पर्याप्त आराम करें। डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। इसलिए भी आराम जरूरी है।
यह हैं लक्षण
डेंगू : अचानक तेज बुखार आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द के साथ शरीर से लाल चकत्ते बनना। साथ ही उल्टी-दस्त, चक्कर आना, प्लेटलेट्स का गिरना और कमजोरी महसूस होना।
चिकनगुनिया : सिर व मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों में सूजन। सूखी उबकाई आना और शरीर में अत्यधिक थकान महसूस होना।
डेंगू की रिपोर्ट न भेजने वाले सीएमओ पर होगी कार्रवाई
- प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने अफसरों को दी चेतावनी
- सरकारी तौर पर मेरठ में डेंगू के 19 मरीज माने गए
लखनऊ (ब्यूरो)। डेंगू के मसले पर चौतरफा आलोचना का शिकार हो रहे स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा ने विभाग के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कर कहा कि जो भी सीएमओ डेंगू की डेली रिपोर्ट नहीं भेजेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। जनपथ स्थित सचिवालय में हुई बैठक में प्रमुख सचिव ने कहा कि सूबे में 37 स्थानों पर डेंगू की जांच की सुविधा है। इनमें रैपिड और एलाइजा टेस्ट दोनों की सुविधा उपलब्ध है। इन जांचों की रिपोर्ट भी अधिकारी उन्हें प्रतिदिन उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने डेंगू के आंकड़ों में हो रही बाजीगरी पर अफसरों को फटकार लगाई। कहा कि आंकड़े भेजने में भी लापरवाही हो रही है। चिकित्सक डेंगू के बारे में कुछ रिपोर्ट देते हैं, जबकि अधिकारी दूसरी रिपोर्ट दे रहे हैं। इससे भ्रम फैल रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि डेंगू के आंकड़े सही-सही दिए जाएं।