राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल हत्याकांड के आरोपी की जमानत खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल हत्याकांड में आरोपी श्याम धानक के जमानत प्रार्थना पत्र को न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट संख्या- 1 राकेश कुमार ने खारिज कर दिया है।
मामूली रुपये के लेन देन को लेकर राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी की हत्या फास्ट फूड संचालक श्याम धानक ने ईंट मारकर की थी। आरोपी हत्या करने के बाद चंडीगढ़ भाग गया था। जिसे कंकरखेड़ा थाना पुलिस ने चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। 8 मार्च 2026 को अनुष्का पाल ने फोन पर बताया था कि उसे गाजियाबाद में कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने जाना है। 16 अप्रैल 2026 को उसका मोबाइल बंद था। अनुष्का पाल के न मिलने पर उसके पिता ने 28 अप्रैल को थाना कंकरखेड़ा में एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज व सीडीआर से अनुष्का की अंतिम लोकेशन श्याम धानक के साथ मिली थी। श्याम धानक द्वारा 15 अप्रैल को 3600 रुपये वापस मांगने पर और न दिए जाने पर ईंट मारकर उसकी हत्या करने का अपराध करना बताया था। घटना के डेढ़ माह बाद शव कंकाल के रूप में मेरठ बाइपास रोहटा रोड के पास नाले में पड़ा मिला था।
न्यायालय में आरोपी पक्ष ने अपने को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर फर्जी तरीके से फंसाए जाने का आरोप लगाया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से बताया कि आरोपी 2008 के एक हत्या के एक मामले में आरोपी 16 साल की सजा काटकर जेल से आया था। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया लेनदेन के चलते घटना होना प्रतीत होती है। न्यायालय ने जमानत प्रार्थना पत्र को उचित आधार न पाते हुए खारिज कर दिया।
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सुशांत सिटी मामले में आपराधिक कार्रवाई की मांग खारिज
-सीजेएम कोर्ट ने कहा- विवाद सिविल प्रकृति का, आरोपों से संज्ञेय अपराध नहीं बनता
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सुशांत सिटी प्रकरण में सेक्टर-7 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह खोखर की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज कुशवाहा की अदालत ने खारिज कर दिया।
इस प्रार्थना पत्र में राजेंद्र खोखर ने उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव, प्रबंध निदेशक आवास बंधु सचिव आवास एवं शहरी विकास विभाग उपाध्यक्ष मेरठ विकास प्राधिकरण बैंक कंपनी के बिल्डर प्रणव अंसल सहित 13 व्यक्तियों के खिलाफ षड्यंत्र और जालसाजी करते हुए टाउनशिप में मूलभूत सुविधाओं की कमी, रखरखाव में लापरवाही, अनुचित शुल्क वसूली और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए पुलिस जांच कराए जाने की मांग की थी।
प्रार्थी की ओर से आरोप लगाया गया था कि टाउनशिप में पानी की टंकी, बाउंड्री वॉल, सीवर, मेनहोल, स्ट्रीट लाइट, सड़क आदि मूलभूत सुविधाएं समुचित रूप से उपलब्ध नहीं कराई गईं। रखरखाव के नाम पर शुल्क वसूली, फर्जी नोटिस व मांग पत्र जारी करने तथा धन के दुरुपयोग के भी आरोप लगाए गए थे।
सभी सरकारी विभागों के अधिवक्ता ने आरोपों को गलत बताते हुए अपना पक्ष रखा। आदेश के अनुसार 4 विपक्षी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी हैं और उनके संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। अदालत ने सुनवाई के बाद कहा कि केवल सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने, रखरखाव में लापरवाही करने अथवा नियम-शर्तों के उल्लंघन से धोखाधड़ी, कूटरचना अथवा आपराधिक न्यासभंग जैसे अपराध स्वतः गठित नहीं होते। कूटरचना के लिए किसी अन्य व्यक्ति के अधिकार, हस्ताक्षर या प्राधिकार का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए जाने का स्पष्ट आधार आवश्यक है, जो मामले में सामने नहीं आया।
अदालत ने यह भी कहा कि सुविधाओं की कमी अथवा रखरखाव में लापरवाही का विवाद अधिकतम सिविल प्रकृति का हो सकता है और इसके लिए सक्षम न्यायालय से उचित राहत ली जा सकती है। उपलब्ध रिकॉर्ड से आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बनता। अंततः अदालत ने दाखिल प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।