पंजाब की नाभा जेल ब्रेक होने के बावजूद भी जेल प्रशासन गंभीर नहीं हुआ। मेरठ जिला जेल में नशा करने से लेकर खुलेआम घूमने तक की बंदियों को आजादी मिली हुई है। ऐसी स्थिति में बंदी भाग जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। शनिवार को जेल के बाहर बंदियों के साथ ऐसा ही देखा गया। दीवार निर्माण करने में करीब 20 बंदी लगे थे। जहां पर उन्हें खुद पुलिसकर्मी बीड़ी सिगरेट समेत अन्य सुविधा मुहैया करा रहे थे।
मामला चौधरी चरणसिंह जिला कारागार का है। जेल के मुख्य द्वार के सामने एक दीवार का निर्माण चल रहा है। जिस पर जेल में बंद करीब 20 बंदी लगे थे। उसकी देखरेख के लिए सिर्फ चार सिपाहियों को छोड़ा, जोकि बंदियों की खातिरदारी करने में लगे थे। एक सिपाही ने बंदियों को बीड़ी सिगरेट और तंबाकू की व्यवस्था कराई। हालात ऐसे थे कि बंदी पुलिसकर्मियों को चकमा देकर आसानी से भाग सकते थे। जिस पर जेल प्रशासन पर सवाल उठ सकते थे। इस दौरान बंदियों को खाना भी बाहर से लाकर दिया गया। सिपाहियों ने बताया कि जेल प्रशासनिक अधिकारियों की परमिशन पर बंदियों को धूम्रपान और खाने की सुविधा बाहर दी है। बंदियों पर निगरानी के लिए जेल रोड पर बैरियर लगाए थे।