बागपत में कस्बा निवासी कबड्डी टीम के इंटरनेशनल कोच चरण सिंह मानव ने नेत्रहीनों की टीम का गठन करके ऐतिहासिक कार्य किया था। इस उपलब्धि पर उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
कोच चरण सिंह मानव ने 1950 में कबड्डी के खेल को आगे बढ़ाने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडिया के नाम से कबड्डी फेडरेशन का गठन किया था। इसके बाद उन्होंने नेशनल के लिए लड़कियों की एक टीम तैयार की। 1961 में खेल को यूनिवर्सिटी में शामिल किया गया। 1963 में इलाहाबाद में नेशनल कबड्डी प्रतियोगिता हुई। 1974 में कोलकाता में चैंपियनशिप आयोजित की गई थी।
चरण सिंह मानव बताते हैं कि 1990 में कबड्डी को एशियाड में शामिल किया गया। यह खेल भारत के अलावा श्रीलंका, जापान, बंगलादेश, मलेशिया, चीन, दक्षिण कोरिया, ईरान और थाईलैंड भी लोकप्रिय बना। चरण सिंह मानव ने नेत्रहीन युवकों की कबड्डी की टीम तैयार की, जिनको निरंतर अभ्यास कराया जाता रहा। जिसके बाद उन्हें प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया गया। नेत्रहीन टीम बनाने पर उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
इसकी जानकारी कस्बे के लोगों को मिली तो खुशी की लहर दौड़ गई। चौधरी हिम्मत सिंह, आलोक, नरेश संजय, पिंटू, ताहिर, सुमित, सोनू, आकाश, बादल ने बताया कि कबड्डी कोच ने पहले ही कस्बे के नाम रोशन किया था, अब पूरे देश में विख्यात हो गए हैं। कोच ने ही वर्ष 2012 में मानव स्पोर्ट्स क्लब का गठन किया था, जिससे युवाओं में कबड्डी के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
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