फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटे-बहू ने मुंह मोड़ा तो बदले वारिस: छह महीने में 230 वसीयतनामे निरस्त; बेटियों और रिश्तेदारों को दी संपत्ति

Tue, 27 Oct 2026 03:15 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत

सार

बागपत, बड़ौत और खेकड़ा के उप निबंधक कार्यालयों में छह महीने में 230 वसीयतनामे निरस्त किए गए। देखभाल नहीं मिलने पर कुछ माता-पिता ने बेटों की जगह बेटियों और दूसरे रिश्तेदारों को संपत्ति का वारिस बनाया।

विज्ञापन
प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बड़ौत में दिल्ली रोड पर रहने वाले नरेंद्र ने बेटे विजय के नाम तीन सौ गज के प्लॉट का नवंबर 2025 में वसीयतनामा किया था। बेटे व बहू ने सेवा करनी बंद कर दी और उनका व्यवहार बदल गया तो वसीयतनामा अगस्त 2026 में निरस्त करा दिया। बिनौली मार्ग पर रहने वाले महक ने भी बेटे के देखभाल नहीं करने पर सितंबर 2026 में वसीयतनामा निरस्त करा दिया।

विज्ञापन


बागपत, बड़ौत और खेकड़ा में उप निबंधक कार्यालयों में इस तरह छह महीने में 230 वसीयतनामे निरस्त किए गए। माता-पिता जीवनभर मेहनत करके संपत्ति जुटाते हैं और बुढ़ापे में बेटे-बहू से सेवा की उम्मीद रखते हैं। इसी भरोसे में वह अपनी संपत्ति की बेटे के नाम वसीयत कर देते हैं। लेकिन जब बेटा-बहू देखभाल तक बंद कर देते हैं तो माता-पिता पहले की गई वसीयत निरस्त कराकर दूसरे बेटे, बेटी या अन्य रिश्तेदार को वारिस बना देते हैं।

यह भी पढ़ें: मेरठ MLC मतगणना केंद्र पर हंगामा: निर्दलीय प्रत्याशी विक्रांत वशिष्ठ और दरोगा की तीखी बहस; बोले- औकात में रहो

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

केस नंबर एक
सेवा बंद की तो बड़े भाई के बेटे के नाम कर दी वसीयत बड़ौत की पट्टी चौधरान के राजकुमार कहते हैं कि बेटे-बहू ने ध्यान रखना बंद कर दिया था। इसलिए पहले की वसीयत निरस्त कराकर संपत्ति बड़े भाई के बेटे के नाम करा दी। उनका कहना है कि माता-पिता जीवनभर बच्चों को पालते हैं, लेकिन बुढ़ापे में जब अपने ही देखभाल नहीं करते तो उन्हें संपत्ति के बारे में दोबारा सोचना पड़ता है।

केस नंबर दो
बेटे-बहू ने देखभाल नहीं की तो बेटी को बनाया वारिस बिजरौल के सुखबीर कहते हैं कि अपनी संपत्ति बेटी के नाम कर दी। बेटे-बहू से दो वक्त की रोटी की उम्मीद थी मगर वह भी नहीं मिली तो पहले की वसीयत निरस्त करा दी। बेटी ने साथ दिया तो उसे संपत्ति का वारिस बनाने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि माता-पिता को बुढ़ापे में सहारे की जरूरत होती है। जब बेटा जिम्मेदारी नहीं निभाता तो बेटी भी माता-पिता की देखभाल करके उनका भरोसा जीत सकती है।
 
वसीयतनामा व्यक्ति की इच्छा के अनुसार तैयार किया जाता है। वसीयत करने वाला व्यक्ति अपने जीवनकाल में नियमानुसार इसे निरस्त कर सकता है या नई वसीयत बनवा सकता है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें माता-पिता ने अपनी संपत्ति की वसीयत अपने बच्चों के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति या बेटी के नाम करा दी है। -शुभ्रा राय, उप निबंधक, बड़ौत।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें