कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इलाकों में जहां लोग पीड़ित हैं, न तो कोई स्वास्थ्य का चैक अप हुआ और न ही कोई जनता के लिए जागरूकता का कार्यक्रम किया। गांवों के हैंडपंप अभी भी गंदा पानी उगल रहे हैं। लोग अभी भी इस गंदे पानी को पी रहे हैं। अधिकारियों ने जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया। सरकार ने दूषित पानी से ग्रसित मरीजों तथा मृतकों को जो मुआवजा देने था, उनकी पहचान तक नहीं की। कमेटी ने अपनी सिफारिश की है कि सरकार नदियों को साफ सुथरा समय सीमा में करें।
एनजीटी ने आदेश किया है कि अधिकारी इस आदेश को ढिलाई से न लें और मुख्य सचिव को अधिकारियों के प्रति रोष जताया है। जो अधिकारी इसकी अवहेलना करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मुख्य सचिव को मॉनिटरिंग टीम को सभी सुविधा देने के आदेश दिए। हेड ऑफ डिपार्टमेंट यदि गलत पाया जाता है, तो उसके खिलाफ 10 करोड़ का जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान भी नियम के तहत किया जा सकता है। इसके लिए सरकार पांच करोड़ की परफोरमेंस गारंटी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड में जमा कराएगी। पालन न होने पर यह राशि जब्त कर ली जाएगी। अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
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