नेपाल के 28 जमातियों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने गलती स्वीकार की है। सीजेएम निशांत मान ने जमातियों पर 1400-1400 रुपये का अर्थदंड लगाया। बचाव पक्ष ने अर्थदंड जमा कर दिया है। अब जमातियों को अस्थायी जेल से छोड़े जाने और घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है।
दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से नेपाल के 28 जमाती जिले में आए थे। इनमें 17 जमाती रटौल गांव और 11 जमाती बागपत नगर के एक मकान में ठहरे थे। लॉकडाउन के उल्लंघन, महामारी अधिनियम की धारा-3, आपदा प्रबंधन अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता इफ्तिखार हसन ने बताया कि अस्थायी जेल में रखे जमातियों की जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। सीजेएम निशांत मान ने सुनवाई की।
जमातियों ने कोर्ट के सामने गलती स्वीकार की। यह भी कहा कि वे मजदूर वर्ग के व्यक्ति हैं। उन्हें कम से कम सजा दी जाए। सीजेएम ने विदेशी जमातियों पर 1400-1400 रुपये का अर्थदंड लगाया। बचाव पक्ष ने अर्थदंड जमा करा दिया। शुक्रवार को अदालत ने आदेश जारी किया। अस्थायी जेल से जमातियों की रिहाई अब सोमवार तक होने की संभावना है। इसके बाद वे घर तक कैसे जाएंगे, इसका फैसला प्रशासन करेगा।
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नेपाल से आए जमातियों में चार कोरोना संक्रमित मिले थे। रटौल गांव के एक युवक को भी संक्रमित किया था। हालांकि उपचार के बाद पांचों लोग ठीक हो गए थे।
अस्पताल से भागे जमाती पर दोगुना अर्थदंड
कोविड अस्पताल खेकड़ा से नेपाल का एक जमाती भाग गया था। पुलिस ने किसान की मदद से उसे एक ईंट भट्ठे से पकड़ लिया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता इफ्तिखार हसन ने बताया कि अस्पताल से भागे जमाती पर दोगुना अर्थदंड लगाया गया है।
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