बागपत में खेल के मैदान पर फिर आंसू बहे और भावनाओं का ज्वार उठा। अपने भाई जैसे खिलाड़ी पवन के फाइनल में पहुंचने से पानीपत के कोच अरुण मलिक उत्साहित थे। लेकिन बागपत पहुंचने से पहले ही घर पर अचानक उनका निधन हो गया। उनकी मौत के बावजूद गम में डूबे पवन नरवाल रिंग में उतरे और गोल्ड जीता। आंखों में आंसू लिए पवन ने अपना मेडल कोच को समर्पित किया।
सोनीपत के रिढाना गांव निवासी पवन नरवाल ने पूरी प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाया। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के पवन का हौसला बढ़ाने के लिए हर मुकाबले से पहले उनके बड़े भाई जैसे कोच अरुण मलिक पानीपत से पहुंचते थे। क्वार्टर और सेमीफाइनल के दौरान भी अरुण मौजूद थे। बुधवार रात वह यह कहकर बागपत से पानीपत गए थे कि बृहस्पतिवार सुबह लौट आएंगे। लेकिन अरुण नहीं लौटे और एक बुरी खबर आई। बॉक्सिंग कोच अरुण का अचानक निधन हो गया। मुकाबले से पहले ही पवन तक यह बात पहुंची, तो उन्हें बड़ा सदमा लगा। कोच की मौत से बुरी तरह टूट चुके पवन ने खुद को संभाला और फाइनल के लिए तैयार हुए।
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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र के लाजवाब बॉक्सर यशपाल से उनका मुकाबला हुआ। पवन ने यह मुकाबला जीत लिया। पवन ने अपना पदक अरुण मलिक को समर्पित किया।
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