सोमवार सुबह इस घटना से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही डीएम और एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचकर नदी में मां-बेटी की तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। स्थानीय गोताखोर भी नदी में दोनों की तलाश कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बुग्गी व भैंसें के शव को बाहर निकाला
काठा गांव निवासी 65 वर्षीय किसान सहेंद्र की यमुना नदी के पार पांच बीघा कृषि भूमि है। जिसमें गन्ने की फसल खड़ी हुई है। सोमवार को सुबह करीब छह बजे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के पुल के पास से यमुना नदी पार करने लगे तो पानी का बहाव तेज होने के कारण भैंसा-बुग्गी नदी में पलट गई।
बुग्गी में सवार किसान सहेंद्र, उसकी पत्नी राजबीरी (50), बेटी कोमल (20), दिव्यांग बेटा नीटू (30) नदी में डूब गए। किसान सहेंद्र और उसके बेटे नीटू ने तैरकर अपनी जान बचा ली, लेकिन मां-बेटी नदी में समा गई। नदी किनारे ग्रामीणों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने पुलिस को हादसे की सूचना दी।
पुलिस गोताखोरों को साथ पहुंची। मां-बेटी की तलाश कराई, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। एनडीआरएफ टीम ने यमुना नदी में कई किमी तक मोटर बोट से मां-बेटी की तलाश की। मंगलवार को मां एनडीआरएफ की टीम ने मां की लाश को नदी से बाहर निकाला।
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