न्यायपीठ ने कहा कि नाबालिग उम्र में की गई शादी कानूनी तौर पर अवैध होती है। बाल विवाह करना कानूनन अपराध है और उसका उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होती है। काफी देर समझाने के बाद किशोरी ने अपने किए पर खेद व्यक्त कर अपनी मां के साथ जाने पर सहमति दी। न्यायपीठ ने किशोरी को उसकी मां की सुपुर्दगी में देने का आदेश जारी किया। साथ ही मां को भी अपनी बेटी की ठीक प्रकार से देखभाल करने की हिदायत दी। इसमें कोताही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की भी चेतावनी दी।
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