आंखों की रोशनी गई, जिंदगी में उजाला
खेकड़ा में 20 साल पहले एथलीट अंकुर धामा की आंखों में होली के दिन रंग चला गया। इससे अंकुर की आंखों की रोशनी चली गई, लेकिन आठ सौ एवं 1500 मीटर के इस पैरा एथलीट ने देश को कई स्वर्ण पदक दिलाए और ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया। वर्तमान में वह ओलंपिक की तैयारी में ही जुटा है। अंकुर के भाई गौरव धामा ने बताया कि पांच साल की उम्र में अंकुर की आंखों में रंग चला गया। तमाम इलाज कराया, लेकिन रोशनी नहीं लौटी। परिवार ने उसका दाखिला दिल्ली के लोदी रोड स्थित जेपीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर ब्लाइंड में करवा। यहीं से अंकुर की जिंदगी बदल गई। शिक्षकों ने अंकुर के खेलों के प्रति रुझान को देख उसे दौड़ में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
फिर कामयाबी के शिखर पर अंकुर धामा
अंकुर धामा के खेल की बात करें तो पहली बार बड़ी कामयाबी साल 2009 में मिली। वर्ल्ड यूथ एंड स्टूडेंट चैंपियनशिप में अंकुर धामा ने दो गोल्ड मेडल जीतकर पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाया था। अंकुर धामा ने साल 2014 में एशियन पैरा गेम्स में एक सिल्वर और दो कांस्य मेडल जीते थे।
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