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बड़ों के घमासान की भेंट चढ़े छोटे नेता

Tue, 04 Oct 2016 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच चल रही घमासान की गाज मेरठ के तीन नेताओं पर गिरी है। खास बात यह है कि इसमें मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले अतुल प्रधान का टिकट कट गया तो शिवपाल के खास पिंटू राणा को सरधना से टिकट दिया गया है। मेरठ शहर की सीट को लेकर सपा की अंदरूनी रिपोर्ट में बेहतर संकेत माने गए थे, लेकिन अब यहां पर रफीक अंसारी की जगह अयूब अंसारी चुनाव लड़ेंगे। कैंट सीट पर नए चेहरे के तौर पर आरती अग्रवाल अब सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। टिकटों में फेरबदल के बाद अब पार्टी में गुटबाजी की संभावना भी बढ़ गई है।
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सरधना में सीएम नहीं, अब शिवपाल के खास
पिछले सप्ताह जब सरधना के प्रत्याशी रहे अतुल प्रधान को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस दिया था, तभी माना जा रहा था कि बात यहीं नहीं रुकेगी। तभी से यह चर्चा चल रही थी कि सरधना से अतुल की जगह शिवपाल के खास माने जाने वाले पिंटू राणा को टिकट दिया जा सकता है। सोमवार को सपा के टिकटों की नई सूची में अतुल के टिकट कटने पर मुहर लग गई। अतुल को सीएम अखिलेश ने पिछले साल फलावदा में हुई रैली में ही जनता से जिताने का आह्वान किया था। पिंटू राणा क्षत्रिय हैं। माना जा रहा है कि संगीत सोम को ठाकुरों के गढ़ में चुनौती देने के लिए पिंटू को मैदान में उतारा गया है।

कैंट सीट पर वैश्य महिला पर दांव
कैंट में परविंदर सिंह ईशु का टिकट काटकर आरती अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया गया। आरती का कहना है कि वह आठ महीने से ही पार्टी में सक्रिय हैं। आरती को टिकट देने के पीछे मंशा वैश्य समाज और महिलाओं की पार्टी में नुमाइंदगी बढ़ाने की है। डॉ. सरोजिनी अग्रवाल के बाद आरती अग्रवाल को पार्टी आगे बढ़ा सकती है। कैंट सीट पर वैश्य मतों की संख्या सबसे ज्यादा है। भाजपा से भी यहां पर वैश्य उम्मीदवार ही रहा है। ऐसे में भाजपा को भी नुकसान हो सकता है। आरती को टिकट दिलाने में मंत्री शाहिद मंजूर खेमे का भी अहम रोल माना जा रहा है। आरती गंगानगर में रहती हैं और दिव्य गोरक्षा सेवा संस्थान की राष्ट्रीय संयोजक हैं। सपा एमएलसी डॉ. सरोजिनी उनकी रिश्ते की मौसी लगती हैं। आरती का कहना है कि उन्हें टिकट मिलने में डॉ. सरोजिनी का भी अहम रोल है।
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रफीक की जगह अब अयूब होंगे अंसारी चेहरा
पिछले विधानसभा चुनाव में रफीक अंसारी ने शहर सीट पर अच्छा चुनाव लड़ा था। इसके बाद मेयर के चुनाव में मिले अच्छे-खासे मतों के कारण उनको सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था। सपा के स्थानीय नेता इस सीट को समीकरणों के अनुसार अपने लिए बेहतर भी मान रहे थे। ऐसेे में रफीक  की जगह अयूब अंसारी को टिकट मिलना चौंकाने वाला है। अयूब को भी शिवपाल खेमे का माना जाता है। रफीक अंसारी हथकरघा वस्त्र उद्योग में सलाहकार हैं तो अयूब अंसारी कारागार विभाग के सलाहकार हैं। अयूब भी सपा से मेयर का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा अयूब निर्दलीय विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। आपसी गुटबाजी इस सीट पर बड़ी भूमिका निभा सकती है।

दम लगाकर लड़ेंगे चुनाव
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जो भरोसा जताया है, उसके लिए उनका आभारी हूं। सपा ने प्रदेश में खूब विकास कराया है और विकास के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा।
पिंटू राणा, सपा प्रत्याशी, सरधना

पार्टी नेतृत्व ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। चुनाव जीतने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। सभी मिलकर प्रदेश में फिर से सपा की सरकार बनवाएंगे।
- अयूब अंसारी, प्रत्याशी, मेरठ शहर

सपा में हर वर्ग को बराबर सम्मान दिया जाता है। पार्टी ने मुझे कम समय में बड़ा काम करने का जिम्मा दिया है। अपनी पूरी टीम और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चुनाव लड़ेंगे।
- आरती अग्रवाल, कैंट सपा प्रत्याशी

क्या बोले टिकट कटने वाले
पार्टी का सिपाही हूं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर काम करता रहूंगा। पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव का आदेश सर्वोपरि है। पार्टी को जिताने के लिए पूरी मेहनत की जाएगी।
- अतुल प्रधान, सपा नेता

पार्टी ने हमेशा सम्मान दिया है। एक छोटे से कार्यकर्ता से लेकर कई जिम्मेदारियां दी हैं। अब पार्टी के फैसले का तहेदिल से सम्मान है। मेरठ शहर में इस बार सपा की जीत होगी।
- रफीक अंसारी, सपा नेता

एक युवा कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी ने हमेशा मेहनत को सम्मान दिया और कम समय में कई बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। टिकट देना या न देना पार्टी के बड़े नेताओं का फैसला है। 13 साल से पार्टी के साथ हूं। एमडीए बोर्ड में सदस्य रहने के साथ आठ साल यूथ ब्रिगेड का महानगर अध्यक्ष रह चुका हूं।
- परविंदर ईशु, सपा नेता


सपा में गुटबाजी आई सामने
सर्किट हाउस में जैसे ही मुलायम संदेश यात्रा पहुंची, कई कार्यकर्ताओं ने टिकट वितरण पर विरोध जता दिया। महेश चावला ने कहा कि पार्टी में पुराने लोगों की उपेक्षा की जा रही है। कुछ महिला कार्यकर्त्रियों ने भी इस पर ऐतराज जताया। हालांकि, महेश चावला को डॉ. सरोजिनी का करीबी माना जाता है। इस दौरान परविंदर ईशु भी सर्किट हाउस मे मौजूद रहे।
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