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बच्चों के डीएनए पर भी खतरा

Mon, 07 Nov 2016 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 वातावरण में छाई सल्फर और प्रदूषण के कण बच्चों के लिए बेहद घातक हैं। चिकित्सकों और पर्यावरणविदों के अनुसार बच्चों के फेफड़ों, दिमाग पर इसका सीधा असर हो सकता है। इससे बच्चे की याददाश्त की कमी के अलावा न्यूरो और कैंसर की बीमारी का खतरा बढ़ गया है। बच्चा अगर लंबे समय तक धुंध क ी चादर के संपर्क में रहे तो उसका विकास भी प्रभावित होगा। कुछ विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि डीएनए पर भी असर हो सकता है। हाल में सेंटर फॉर साइंस ने शहर की हवा की जांच की तो यहां पीएम (पर्टिकुलेट मैटर) का स्तर मानक से छह गुना अधिक पाया गया था। यूनिसेफ से जारी सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में भी मेरठ देश में 16वें नंबर पर था।
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पीएम 2.5 है बेहद घातक
धुंध में ज्यादा मात्रा पीएम 2.5 की है। पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 सिर के एक बाल से भी बारीक, हल्का और महीन कण होता है। प्रकाश कणों की तरह ये कण दिखाई नहीं देते, लेकिन इनकी परत वातावरण में बन जाती है। यह सांस के जरिये फे फड़ों से होते हुए शरीर में प्रवेश कर रहा है। नाइट्रोजन, सल्फर, बैंजीन, क्र ोमियम, निकिल, हानिकारक बैक्टीरिया, पटाखों से निकले केमिकल, कार्बन, हानिकारक धातु, रसायन आदि से मिलकर ये कण बनते हैं। विश्व में सबसे पहले स्मॉग वर्ष-1952 में लंदन में में देखा गया था।

अम्लीय वर्षा जैसे हालात
वाहनों से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन होते हैं। कारखानों की चिमनियों से सल्फर डॉइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड निकलता है। यह सब मिलकर स्मॉग बनाते हैं। यही गैसें वातावरण में पानी की भाप से मिलकर सांद्र एसिड जैसे सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड बनाते हैं। इससे अम्लीय वर्षा तक हो सकती है।
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- डॉ. मधु वत्स, पर्यावरण विद

बच्चों के डीएनए और दिमाग पर असर
स्मॉग में वीओसी (वॉल्टाइल आर्गेनिक कंपाउड) होते हैं। यह बच्चों मेें पेट की दिक्कत, व्यवहार में बदलाव, याददाश्त में कमजोरी और फेफड़ों आदि पर असर डालता है। यहां तक कि बच्चों का डीएनए भी सल्फर और बैंजीन, क्रोमियम से प्रभावित हो सकता है। शॉर्ट टर्म और लांग टर्म दोनों ही असर बच्चों पर पड़ते हैं।
- डॉ. वीएन त्यागी, सांस रोग विशेषज्ञ

गल सकती हैं सांस नलियां
बच्चों की सांस नलियां बेहद नाजुक होती हैं। उनके फेफड़ों के आसपास पतली-पतली झिल्लियां होती हैं। आरएसपीएम, पीएम 2.5 के कण नाक के जरिये बच्चों के फे फड़ों की झिल्लियों तक आसानी से पहुंच जाते हैं। झिल्ली से चिपके रहने के कारण अंदर ही अंदर सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने लगते हैं। इससे बच्चों के सांस की नलियां गलने लगती हैं। मलिन बस्तियों के बच्चों में यह समस्या काफी देखी जा रही है।
- डॉ. राजीव तेवतिया, बाल रोग विशेषज्ञ

कैंसर का खतरा बढ़ता है
पीएम 2.5 के खतरनाक बारीक कण सीधे सांस के जरिये शरीर में पहुंचते हैं। अंदर जाकर ये कण सेल्स से चिपककर खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर देते हैं। इस कारण कैंसर का खतरा बढ़ता है। चूंकि बच्चों की नाक में बाल नहीं होते, इसलिए उन पर स्मॉग का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

5 गुना बढ़ गया है शहर में सामान्य दिनों की अपेक्षा प्रदूषण
 शहर की आबोहवा में घुलती जहरीली धुंध के कारण पब्लिक स्कूलों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सभी बच्चों को मास्क पहनकर स्कूल आने को कहा गया है। अभिभावकों को मैसेज कर यह जानकारी दे दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो सामान्य दिनों की अपेक्षा शहर में पांच गुना अधिक प्रदूषण बढ़ गया है, जो सेहत के लिए काफी खतरनाक है। धुंध का बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
धुंध का असर जिस समय सबसे ज्यादा होता है, तभी बच्चे स्कूल जाते हैं। ऐसे में नौनिहालों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है। दीवान पब्लिक स्कूल, सेंट जोंस स्कूल, शांति निकेतन विद्यापीठ सहित शहर के अन्य स्कूलों ने दोपहर में ही अभिभावकों को मैसेज करके  बताया कि बच्चे सोमवार को मास्क पहनकर स्कूल आएं। सहोदय सचिव राहुल केसरवानी ने बताया संगठन की ओर से अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन सोमवार को इस पर विचार किया जाएगा। वहीं स्कूलों के निर्देश के बाद अभिभावकों ने मास्क खरीद लिए। मेडिकल स्टोरों पर काफी भीड़ रही।

स्कूलों में जाएगी ट्रेनिंग
शहर के स्कूलों में सोमवार को बच्चों को धुंध से बचने क ी जानकारी दी जाएगी। असेंबली व क्लासेस में बच्चों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

बाजार में है तीन तरह के मास्क
पॉल्यूशन मास्क  - फिल्टर पेपर लगा है। इस फिल्टर पेपर को आप चेंज कर सकते हैं। ऊपर का कवर प्लास्टिक का है, लंाग टाइम यूज हो सकता है। होलसेल में 25 रुपये कीमत है।
ऑर्डिनरी मास्क - इसकी कीमत 2 रुपये है। 100 पीस के डिब्बे की कीमत 200 रुपये है। अमूमन अस्पतालों में इसका इस्तेमाल होता है। यूज एंड थ्रो होते हैं।
चाइना मास्क - टू लेयर मास्क होता है। चाइना का होने के कारण इसकी मांग कम है। इसकी कीमत 20 रुपये तक है।  

अभिभावकों को किया है मैसेज
बच्चों को मॉस्क पहनकर आने को कहा है। अभिभावकों को मैसेज भेजकर इसकी सूचना दी है। स्मॉग से प्रोटक्शन के लिए यह संदेश दिया गया है। - एचएम राउत, प्र्रिंसिपल दीवान पब्लिक स्कूल
 
स्मॉग बच्चों के लिए घातक
मैसेज के जरिये पैरेंट्स को जानकारी दी है। स्मॉग बच्चों के लिए काफी घातक है, इसलिए मास्क पहनकर आने का संदेश दिया है। - चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल सेंट जोंस स्कूल
 
बढ़ गई है बिक्री
सर्जिकल की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ लगी है। पैरेंट्स काफी संख्या में मॉस्क लेकर जा रहे हैं। कई स्कूलों ने मॉस्क लगाकर आने का आदेश दिया है। - रजनीश कौशल, महामंत्री जिला ड्रगिस्ट एसोसिएशन
 
पॉल्यूशन मास्क की डिमांड
एक ही दिन में 2 हजार से ज्यादा मॉस्क सेल हुए हैं। रुटीन और पॉल्यूशन मास्क की ज्यादा डिमांड है। दीवान, सेंट जोंस के अलावा अन्य स्कूलों ने भी बच्चाें को मास्क लगाकर आने को कहा है।
- मनोज शर्मा, संचालक शर्मा सर्जिकल खैरनगर

दिल्ली की हालत बहुत खराब
मैं शनिवार को दिल्ली छठ पूजा क ा सामान देने अपनी रिश्तेदारी में गई थी। शहादरा के इलाके में इतनी ज्यादा धुंध थी, कि एसी गाड़ी के अंदर भी दम घुट रहा था। मेरे साथ ससुर भी थे। धुंध के कारण उन्हें उल्टियां होने लगीं। गाड़ी से बाहर निकलने पर हालत और भी खराब हो गई। मोदीनगर आकर कुछ राहत मिली।
- रितु भारती, डायरेक्टर अमात्य इंस्टीट्यूट


मोटी होगी धुंध की चादर, बढ़ेगी परेशानी
मेरठ/मोदीपुरम। आसमान में छायी धुंध का असर रविवार को भी बना रहा। सुबह से ही घनी धुंध छाई रही, इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। देहात क्षेत्र में कई वाहन भिड़ गए। धुंध का असर पूरे दिन रहा। सूर्य देवता भी धुंध के सामने बेबस नजर आए। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अभी धुंध की चादर और मोटी होगी।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखों के प्रदूषण के अलावा पंजाब और हरियाणा की ओर से आ रहे धुएं के कारण धुंध छा रही है। दो-तीन दिन से तापमान में आयी गिरावट के कारण भी इसका असर अधिक दिखाई दे रहा है। धुंध तेज हवा या बारिश से साफ होगी। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में काफी गिरावट आयी है। दिन का तापमान 28 .6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जबकि रात का तापमान 13.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। रात का तापमान कम होने की वजह से नमी बढ़ रही है। इससे धूल के कण और नीचे आ गए हैं। इसीलिए दिल्ली एनसीआर के बाद उसके आसपास के इलाकों में धुंध का असर बढ़ गया है।

सुबह को फॉग दोपहर में बन रहा स्मॉग
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन सुभाष का कहना है कि सुबह के समय नमी अधिक होने के कारण कोहरा जैसा बन रहा है, जबकि नौ बजे के बाद यह फॉग स्मॉग के रूप में डेवलप हो रहा है। दिन भर धूल भरे कण आसमान में तैर रहे हैं, जिस कारण से आंखों में भी जलन बढ़ रही है। हवा बंद है और बारिश नहीं हो रही है। जब तक बारिश नहीं होगी और हवा तेज नहीं चलेगी, तब तक राहत मिलने के आसार कम हैं।

ये हो रहा नुकसान
धुंध से आंखों में जलन बढ़ रही है।
अस्थमा के रोगियों की बढ़ रही परेशानी।
हार्ट के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत।
छोटे बच्चों पर पड़ रहा गलत असर।
निमोनिया के मरीज चपेट में आ रहे।

पांच दिन रहेगा धुंध का असर
कम से कम पांच दिन तक धुंध का असर और दिखायी देगा। पंजाब की ओर से आ रही हवा अपने साथ धुएं को ला रही है, इससे स्थिति बिगड़ रही है। लोकल स्तर पर अभी मौसम में कोई परिवर्तन के आसार नहीं दिख रहे हैं।
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- डॉ. एन सुभाष, मौसम वैज्ञानिक आईआईएफएसआर
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