अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी समेत 13 नेताओं पर आपराधिक केस चलाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जमीयत उलमा-ए-हिंद व देवबंदी उलमा ने पुरजोर तरीके से स्वागत किया है। उनका कहना है कि अदालत पर उन्हें पूरा विश्वास है और सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उस विश्वास की पहली सीढ़ी है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई की पिटीशन पर यह फैसला सुनाया गया। जिस पर मुसलमानों की सबसे बड़ी जमात जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय सचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर उन्हें अदालत से इंसाफ मिलेगा इसका पक्का यकीन है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत 13 नेताओं पर आपराधिक केस चलाए जाने का आदेश देकर उनके यकीन को और पुख्ता कर दिया। मौलाना हकीमुद्दीन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उससे कुछ नेताओं का दिमागी संतुलन बिगड़ गया है और वह इस पर अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। साफ तौर पर कहें तो यह उनकी खुली गुंडागर्दी है। न्यायालय में विचाराधीन मामले पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना सरासर गलत है। अदालत को ऐसे नेताओं का संज्ञान लेकर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि कोई भी इंसान अदालत से ऊपर नहीं है। फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी, अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी और मुफ्ती यादे इलाही ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद मसले पर अदालत से उन्हें इंसान जरूर मिलेगा।