इनके खिलाफ दी गई थी तहरीर
गांव लिसाढ़ निवासी सुलेमान द्वारा जिन ग्रामीणों को तहरीर में नामजद किया गया था, उनमें गठवाला खाप के मुखिया बाबा हरिकिशन व उनके बेटे राजेंद्र के साथ ही प्रमोद मलिक, नरेंद्र उर्फ लाला, अनुज, अमित, ब्रह्म, बालिंद्र, राजकुमार, सुरेंद्र, ऋषिदेव, कृष्ण, नीशू, संजीव, रविंद्र, राजेंद्र, बिजेंद्र, विरेंद्र, मोहित, राजू, संजीव, काला, अजीत प्रधान, बबलू व सुनील को नामजद किया गया था।
इनके खिलाफ दर्ज की गई थी रिपोर्ट
एसआईटी की जांच के बाद कुल 13 लोगों नरेंद्र उर्फ लाला, धर्मेंद्र उर्फ काला, विजेंद्र, राजेंद्र, अनुज, अमित, ब्रह्म, सुरेंद्र उर्फ बाबू, कृष्णा, नीशू, शौकेंद्र व बिट्टू उर्फ अरुण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और बाद में उन्हीं के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई थी। इनमें बिट्टू उर्फ अरुण और शौकेंद्र के नाम एसआईटी की जांच में सामने आए थे, जिसके बाद इन्हें आरोपियों में शामिल किया गया था।
सुनवाई में तीनों गवाह हो गए पक्षद्रोही
गांव लिसाढ़ में सुलेमान द्वारा पंजीकृत कराए गए लूटपाट, आगजनी व तोड़फोड़ के मुकदमे में कुल तीन गवाह थे। इनमें खुद वादी सुलेमान के साथ ही लिसाढ़ निवासी आजम व इस्लाम शामिल थे। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी के समक्ष हुई मुकदमे की सुनवाई के दौरान उक्त तीनों गवाह पक्षद्रोही हो गए। इसके चलते न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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