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आयुष्मान भारत: 86 हजार परिवार बिन गोल्डन कार्ड

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आयुष्मान भारत: 86 हजार परिवार बिन गोल्डन कार्ड
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मेरठ। आयुष्मान भारत के तहत जन आरोग्य योजना शुरू हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पाई है। अभी भी 86 हजार 504 लाभार्थी परिवार ऐसे हैं, जिनके गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं। इतना ही नहीं, इसमें शामिल दृष्टि अस्पताल ने अपना नाम वापस ले लिया है और दो कतार में हैं, जो जल्द नाम वापस ले सकते हैं। इनका तर्क यह है कि जो खर्च इलाज में आ रहा है, आयुष्मान योजना में भुगतान उससे काफी कम किया जाता है।
आयुष्मान में जिले में दो लाख 11 हजार 416 परिवार चिह्नित हैं। इनमें 89 हजार 109 परिवार देहात और एक लाख 22 हजार 307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है। इस योजना के तहत 1352 तरह की जांच और सर्जरी समेत पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। इसमें 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार उठा रही है। इस योजना को लाभार्थी को किसी तरह का खर्च नहीं करना होता है। अस्पताल खुद बीमा कंपनी से क्लेम लेता है। एसीएमओ डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि आयुष्मान योजना में 61 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें छह सरकारी अस्पताल हैं और बाकी निजी। दृष्टि अस्पताल ने नाम वापस ले लिया है। दो और अस्पतालों ने अर्जी लगाई है। स्वास्थ्य विभाग बाकी अस्पतालों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
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घर-घर गोल्डन कार्ड पहुंचाने की योजना धड़ाम
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड के लिए भटक रहे लाभार्थियों को घर घर जाकर ‘पर्चा कार्ड’ देने की योजना थी, जो गोल्डन कार्ड की तरह ही स्वास्थ्य सेवा के लिए मान्य है। लेकिन यह योजना भी धड़ाम हो गई है। सारे परिवारों तक इन्हें नहीं पहुंचाया जा सका है। इसमें परिवार के मुखिया समेत परिवार के पांच सदस्यों का विवरण दर्ज हैं।
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