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कमाल का आयुष, आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ लेता हैं किताबें

Tue, 27 Oct 2015 02:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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आंखों से देखकर तो सभी पढ़ लेते हैं, लेकिन छूकर पढ़ना वास्तव में एक अचंभित करने वाला कारनामा है। अहम बात ये है कि यह पढ़ना और लिखना किसी ब्रेल लिपि में नहीं है। बल्कि आंखों पर पट्टी बांधकर समाचार पत्र और किताबों का पढ़ना है। ऐसा ही आश्चर्यजनक कारनामा कर रहा है मेरठ का आयुष। जिसने स्पर्श विधि में चंद घंटों की ट्रेनिंग लेकर अपने को आम बच्चों से अलग सिद्ध कर दिखाया है।
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मीनाक्षीपुरम के डी-15 निवासी आयुष (11) ट्रांसलेम एकेडमी में कक्षा छह का छात्र है। आयुष के पिता सचिन उपाध्याय की लालकुर्ती में रेडीमेड कपड़ों की दुकान है और मां निरोज उपाध्याय गृहणी है। आयुष के पिता सचिन ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्हें स्पर्श विधि की ट्रेनिंग का पता चला और इसके प्रति उत्सुकता बनी। इसके बाद उन्होंने आयुष का 36 घंटे की ट्रेनिंग में एडमिशन करा दिया। दिल्ली के एक ट्रेनर ने करीब एक माह तक उसे  प्रशिक्षण दिया। इसके बाद आयुष ने घर पर अपनी मां और रात में अपने पिता सचिन के साथ लगातार अभ्यास किया।

पढ़ने के लिए स्पर्श ही काफी
आयुष बगैर देखे हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र पढ़ लेता है। यही नहीं समाचार पत्र में प्रकाशित सेलिब्रेटी के फोटो भी पहचान कर बता देता है। इसके अलावा यदि उसके हाथ में रंगीन कागज या कपड़ा दे दिया जाए तो वह उसका रंग तक बता देता है।
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टीवी के साथ भी आश्चर्य
टीवी की साउंड बंद कर उसके चैनल बदलने पर आयुष बता देता है कि इस समय कौन सा चैनल चल रहा है। इतना ही नहीं टीवी पर यदि मैच चल रहा हो तो जिन खिलाड़ियों को वह पहचानता है तो उनके नाम तक बता देता है कि इस समय कौन खेल रहा है। इसके अलावा फिल्म या सीरियल के नाम तक बगैर आवाज के बता देता है।

आंखों पर पट्टी बांध कर लेता है काम
आयुष का कारनामा यहीं तक नहीं है। वह आंखों पर पट्टी बांधकर घर में रखे सारे सामान को इधर से उधर पहुंचा देता है। यदि लाल रंग की प्लेट लाने को कहा जाए तो दर्जनों प्लेटों में से सिर्फ वही प्लेट लेकर आएगा। इसके अलावा घर में आने वाले मेहमान का सिर्फ नाम बताने पर उसके पास जाकर उसे ही पानी या चाय सर्व करेगा।

अभी रात में पढ़ने की निपुणता करनी है हासिल
आयुष के अनुसार यह पूरा कारनामा वह दिन में ही कर पाता है। क्योंकि रोशनी के बीच सामने आने वाली किताब, न्यूजपेपर, सामान या व्यक्ति की एक छाया उसके सामने बन जाती है। जिससे वह पहचान लेता है। लेकिन रात में उससे यह कारनामा अभी नहीं होता है। क्योंकि बंद आंखों के भीतर अंधेरे और बाहर के अंधेरे में उसे कुछ अहसास नहीं हो पाता है। फिर भी वह कमरे के भीतर कम रोशनी के बीच लगातार अभ्यास कर रहा है, ताकि अंधेरे में भी वह अपनी इस कला का प्रदर्शन कर सके।

क्या है स्पर्श विधि
नेत्रहीनों के पढ़ने के लिए ब्रेल लिपि विकसित की गई है। जिसमें अक्षर उभरे हुए होते हैं और नेत्रहीन व्यक्ति उसे छूकर पढ़ता है। लेकिन यह विधि उससे कहीं आगे हैं। सामान्य व्यक्ति इस विधि में प्रशिक्षित होने पर समाचार पत्र या किताब को सामने रखकर आंखों के करीब लाता है और पढ़ लेता है। ऐसा ही वह अन्य कार्यों में भी करता है। आयुष के अनुसार बंद आंखों के भीतर एक छाया सी बन जाती है और फिर वह साफ होकर सामने की तस्वीर स्पष्ट कर देती है। तेज रोशनी में इस विधि में बहुत बेहतर तरीके से काम होता है।
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