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अयोध्या मामले में फैसले को दारुल उलूम ने बताया हैरतंगेज, मुस्लिम समाज से की अमन-चैन की अपील

Sun, 10 Nov 2019 01:28 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/देवबंद
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मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नौमानी बनारसी - फोटो : अमर उजाला
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विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नौमानी बनारसी ने शनिवार को अयोध्या मसले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि बाबरी मस्जिद के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला सामने आया है, यह हमारे लिए हैरतअंगेज और समझ से परे है। 

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मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि इस तरह स्पष्ट सबूतों के बावजूद ये फैसला समझ में आने वाला नहीं है। दूसरी बात यह कि मुकदमा विवादित भूमि पर मालिकाना हक का था। कोर्ट ने ये स्पष्ट नहीं किया कि जमीन का मालिक कौन है। 

उन्होंने कहा कि जहां तक मस्जिद का ताल्लुक है तो हमेशा से हमारा ये रुख रहा है कि मस्जिद अल्लाह की मिल्कियत है और मुसलमान मस्जिद की जमीन का मालिक नहीं होता। जिस जगह एक बार मस्जिद बन गई वह मस्जिद ही रहती है। मस्जिद की हैसियत को किसी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। 

मौलाना बनारसी ने कहा कि हमारी यही अपील है कि अमनो-अमान हर हाल में बाकी रखना चाहिए। मुसलमान न कोई खुद ऐसी हरकत करें जो विवाद का कारण बने और न किसी के उकसावे में आकर कोई गलत कदम उठाएं। अमनों अमान को कायम रखें, ये वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। 

उन्होंने कहा कि सवाल यह पैदा होता ही कि इस फैसले को कबूल करें न करें। इसका निर्णय मामले के पक्षकार करेंगे और यह भी वही तय करेंगे कि इसमें आगे क्या कदम उठाना है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिम समाज के लोग शांति और अमन-चैन कायम रखें।
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वर्षों पुराना विवाद हुआ खत्म
उधर मेरठ में मुस्लिम राजपूत सभा के अध्यक्ष व समाजवादी युवाजन सभा के राष्ट्रीय सदस्य बाबर चौहान खरदौनी ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिल की गहराइयों से बहुत बहुत स्वागत करते हैं। 

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच के पांचों न्यायधीशों ने एकमत से आज अपना निर्णय दिया। हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। कई दशकों के विवाद पर आज माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया। वर्षों पुराना विवाद आज खत्म हुआ। उन्होंने शहर के लोगों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।
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