सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा जताया हुआ है। मौलाना मेहंदी हसन ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर या दूसरे लोग इस मसले को कोर्ट के बाहर सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं और उसे 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था और भक्ति का मामला बता रहे हैं। उन्हें शायद माननीय सुप्रीम कोर्ट के ये जुमले याद नहीं है कि राम मंदिर मिल्कियत और टाइटल सूट का है न कि मंदिर मस्जिद बनने का।
न्यायाधीश ने यह भी कहा था कि सिर्फ वो ही दलील सुनी जाएंगी जिनका ताल्लुक मिल्कियत से होगा। इसलिए मस्जिद को हटाने की बात कहना न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की तौहीन है, बल्कि इंसाफ से उम्मीद खत्म करने की नाकाम कोशिश है। उन्होंने सभी धर्मगुरुओं से न्याय पालिका की गरिमा को बरकरार रखने का आह्वान किया।
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