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अयोध्या प्रकरण: हर क्षेत्र पर खुफिया विभाग की पैनी नजर, दस साल की बड़ी घटनाओं पर मांगी रिपोर्ट

Thu, 07 Nov 2019 12:54 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले जहां सुरक्षा प्लान तैयार किया जा रहा है। वहीं, ऐसे बवालियों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जो पिछले दस साल में माहौल बिगड़ने की प्रमुख घटनाओं में नामजद रहे हैं।
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दंगे और बलवे में नामजद रहे ऐसे 550 लोगों को अभी तक चिह्नित किया जा चुका है। इनके खिलाफ मुचलका पाबंद करने की कार्रवाई चल रही है। उधर डीएम ने शहर में रह रहे किराएदारों, नौकर, मजदूर व हॉस्टलों में रह रहे छात्र छात्राओं के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। 

खुफिया विभाग जहां शहर और देहात के माहौल पर पैनी नजर रखे हुए है। वहीं, सभी सीओ और थाना प्रभारियों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। जिन थाना क्षेत्रों में सांप्रदायिक बवाल की घटनाएं विगत दस साल में हुई हैं, उन थानों से बवाल में नामजद आरोपियों की जानकारी एकत्र की जा रही है। इन आरोपियों की वर्तमान में लोकेशन क्या है, उनकी गतिविधियां क्या हैं, इस संबंध में अलग से निगरानी की जा रही है।
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इसके अलावा शहर और देहात में जो 106 स्थान अतिसंवेदनशील चिह्नित किए गए हैं, वहां शांति समिति की बैठक कर लोगों से फैसले को लेकर संयम बनाए रखने की अपील की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन स्थानों पर फैसला आने वाले दिन से पहले से ही आरएएफ और पीएसी का पहरा रहेगा। यदि माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई या सड़क पर उतरने की कोशिश की गई तो इनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

बवाल की प्रमुख घटनाएं
24 अप्रैल 2011: काजीपुर गांव में एक वर्ग के युवक को पीटने की घटना पर हापुड़ रोड और एल ब्लॉक पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया था। पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी की गई। नौचंदी, मेडिकल और लिसाड़ीगेट व खरखौदा थाने में केस दर्ज हुए। 100 से अधिक बवालियों के पोस्टर थानों में लगाए गए।

10 मई 2014: कोतवाली क्षेत्र के तीरगरान में प्याऊ को लेकर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में दुकानों में तोड़फोड़, आगजनी और फायरिंग हुई थी। एक सराफा कारोबारी के पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरएएफ और पीएसी एक माह से ज्यादा तक तैनात रही थी। कोतवाली थाने में 50 से अधिक आरोपियों पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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2 अप्रैल 2018: एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में बेकाबू भीड़ ने शोभापुर पुलिस चौकी में आगजनी कर पुलिसकर्मियों की राइफल लूट ली थी। हाईवे पर पुलिस की गाड़ियां तोड़ी थीं। कचहरी में आगजनी कर आंबेडकर चौक पर नौचंदी इंस्पेक्टर की जीप फूंक दी थी। बलवाइयों द्वारा की फायरिंग में एक की मौत हुई थी। इस घटना में शहर के कई थानों में बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा समेत 188 आरोपियों पर नामजद केस दर्ज किया गया था।

छह मार्च 2019: कैंट बोर्ड की टीम मछेरान में अतिक्रमण हटाने गई थी तो बलवाइयों ने पुलिस पर मारपीट व फायरिंग की। 200 झोपड़ियों को फूंक दिया। रोडवेज बसों में तोड़फोड़ कर पुलिस पर पथराव किया गया। थाना सदर बाजार में 44 बवालियों पर नामजद और 100 से अधिक अज्ञात पर मुकदमा हुआ था।

इन घटनाओं में भी नजर
सरधना थाना क्षेत्र में खेड़ा पंचायत के दौरान वाहनों में तोड़फोड़ और फायरिंग करने वाले आरोपियों को भी पुलिस ने चिह्नित किया है। इसी साल लोकसभा चुनाव की मतगणना होने वाले दिन भी कुछ लोगों ने हापुड़ रोड और भूमिया पुल पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी, इन्हें भी निगरानी में रखा गया है।
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