मेरठ। मेडा (मेरठ विकास प्राधिकरण) की उच्च व मध्यम आय वर्ग व ई-नीलामी में जबरदस्त रुझान आया है। मेडा ने लैंड मॉनीटाइजेशन के बाद 775 संपत्तियों के लिए दीपावली से पहले चार दिन तक चली ई-नीलामी में चार हजार से ज्यादा लोगों ने बोली लगाई थी। इसमें शताब्दीनगर योजना सेक्टर-4 सी के जे-पॉकेट की 102 संपत्तियों की नीलामी रद्द कर दी गई है। इन्हें अब बल्क में बेचा जाएगा, जिसके लिए इसी महीने ई-नीलामी की तैयारी है।
शताब्दीनगर विकास योजना में 600 एकड़ से अधिक पर किसानों के काबिज होने के कारण प्राधिकरण आज तक कब्जा नहीं ले पाया है। इसमें कई आवंटी तो हाइकोर्ट तक पहुंचे जहां से उन्हें कब्जा दिलाने के आदेश भी हुए। मेडा की टीम और पुलिस-प्रशासन ने पूर्व में कब्जा दिलाने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने भारी विरोध कर टीम को हर बार लौटा दिया। इस बार ई-नीलामी में शताब्दीनगर योजना में ही कई संपत्तियों की बोली तक नहीं आई। इसमें शताब्दीनगर के सेक्टर 4 सी के जे-पॉकेट की भी 102 अर्द्धनिर्मित संपत्तियों को शामिल किया गया था, जिनमें से 39 प्लॉट ऐसे हैं, जिनकी एक भी बोली नहीं आई। वहीं जिन संपत्तियों की बोली आई भी उनमें भी मामूली इजाफे के साथ ही आईं।
मेडा ने सपा सरकार के कार्यकाल में 2013 से 2015 के बीच अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए लोहियानगर सीपी पॉकेट के के-ब्लॉक में दो स्थान पर तथा शताब्दीनगर के सेक्टर-4 सी के जे-पॉकेट में दो स्थानों पर मकान बनाए गए थे। इनका मेडा ने मूल्यांकन कराया है, जो करीब 247 करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अलावा इनके आसपास काफी खाली भूमि है, जिसका प्रयोग हो सकता है। ऐसे में इन्हें बल्क में बेचने का फैसला लिया गया है।
मेडा उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि शताब्दीनगर के सेक्टर-4 सी के जे पॉकेट की 102 संपत्तियों की नीलामी को रद्द कर दिया गया है। इसी महीने काफी संपत्तियों को बल्क में बेचने के लिए ई-ऑक्शन किया जाएगा। इसके लिए सूचना भी जारी कर दी गई है।