काहे की काली सूची, सब घूम रहे कैंपस में
विश्वविद्यालय ने जिन छात्रों को गलत कार्यों के चलते काली सूची में डाल रखा है वही सबसे ज्यादा कैंपस में छात्र नेताओं की भूमिका में नजर आते हैं। इससे ही कैंपस का माहौल बिगड़ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब इन छात्रों को काली सूची में डाल दिया गया तो फिर यह विश्वविद्यालय में एंट्री कैसे कर जाते हैं। पुलिस-प्रशासन भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
रजिस्ट्रार को गंभीर चोटें आईं
इस हमले में रजिस्ट्रार के सिर, चेहरे, गर्दन और हाथों पर गंभीर चोटें आईं। उन्होंने एक निजी चिकित्सक के यहां उपचार कराया। सूचना पर सीओ सिविल लाइन व मेडिकल पुलिस मौके पर पहुंची। रजिस्ट्रार ने बताया कि हमलावरों में एक रेस्टीकेटिड छात्र अमित मलिक था, जो 3 माह पहले भी रजिस्ट्रार कार्यालय में घुसकर बड़ौत के एक कॉलेज के एक संचालक के साथ मारपीट कर चुका है। उसके खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पूरे प्रकरण में पुलिस ने कोई भी जांच पूरी नहीं की। अगर जांच पूरी होती तो दोबारा हमला नहीं होता।
देर रात बुलाई आपातकालीन बैठक
इस प्रकरण को लेकर देर रात करीब 11: 30 बजे विश्वविद्यालय में आपातकालीन बैठक बुला ली गई। कुलपति के बाहर होने के कारण प्रति कुलपति प्रोफेसर वाई विमला और यूनिवर्सिटी के सुरक्षा अधिकारी प्रोफेसर बीरपाल सिंह ने सुरक्षा अधिकारियों और शिक्षकों के साथ बैठक की। पूरे घटनाक्रम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री डीजीपी और एसएसपी को अवगत कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय की तरफ से पुलिस अधिकारियों से यह पूछा जा रहा है कि पिछले मामलों में जब आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज हो गया तो पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
नामजद मुकदमा दर्ज हो रहा
रजिस्ट्रार की तरफ से तहरीर आ गई है। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज निकाली जा रही हैं।
- डॉ. अखिलेश नारायण सिंह, एसपी सिटी
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