महायोजना का अहम प्रस्ताव था नए बस अड्डे बनाना और पुराने बस अड्डों को शिफ्ट करना। यह हो ही नहीं पाया। जबकि बस अड्डों की वजह से यातायात व्यवस्था प्रभावित है। सेटेलाइट बस अड्डे का प्रस्ताव भी गिर गया और उसकी जमीन पर भूखंड आवंटित कर दिए।
महायोजना में उद्योगों के लिए भी प्लान था। कहा था कि शहर से डेयरियों को बाहर किया जाएगा। लेकिन डेयरी बाहर हो ही नहीं पाई। संचालकों ने सस्ती दर पर जमीन मांगी। लेकिन जमीन नहीं दी गई। कैटल कालोनी के लिए एमडीए सीलिंग की जमीन ढूंढ रहा है।
शहर के बीचों बीच दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर है जिसके कारण दिल्ली रोड पर जाम रहता है। मास्टर प्लान में न्यू टीपी नगर का प्रस्ताव था। पांचली में इसके लिए जमीन आरक्षित की गई। लेकिन प्रस्ताव पूरा नहीं हो पाया। यहां तक कि एमडीए ने इसके लिए एडीएम भू अध्याप्ति के यहां जमा दस करोड़ रुपया भी वापस ले लिया।
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि पिछले आठ साल से जुर्रानपुर रेलवे फाटक के पास फ्लाईओवर हवा में लटका है और उसे रोड बनाकर जोड़ा नहीं जा सका है। यह प्रोजेक्ट मेरठ महायोजना में शुमार किया गया था।
देखेंगे कैसे बनेगी बात
इनर रिंग रोड जैसे प्रस्ताव तो शहर के लिए बेहद जरूरी हैं। मैं खुद मास्टर प्लान के ऐसे प्रस्तावों को लेकर गंभीर हूं। अन्य विभागों से भी बात की जा रही है कि इन प्रस्तावों पर कैसे बात बने।
- राजेश कुमार पांडेय, वीसी एमडीए
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