बहसूमा(मेरठ)। बदलते मौसम के चलते गेहूं की फसल में पीला रतुआ का कहर है। बुधवार को रहमापुर निवासी किसान संजय बैसला के आवास पर किसान गोष्ठी हुई। गोष्ठी में किसानों को गेहूं की फसल को दो सप्ताह तक विशेष नजर रखने की बात कही गई।
एग्रीफोर्ट कंपनी के कृषि विशेषज्ञ मुकेश कुमार ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल में पीला रतवा रोग देखा जा रहा है। यह रोग गेहूं में बाली निकलने की अवस्था में दिखाई देता है। यह पत्तियों में उपस्थित क्लोरिफल को खा लेता है। जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती है। अधिक रोग फैलने पर गेहूं में भूसा भी नही बनता है। इस रोग की रोकथाम के लिए प्रोपिकोनाजोल 250 ग्राम या फोलीक्योर की 200 एमएल दवा का प्रयोग प्रति एकड़ करे। गेहूं की बाल पर माहू कीट का प्रकोप दिखाई दे तो ऐमिडा 17.8 प्रतिशत दवा की 100 एमएल मात्रा में 150 ली. पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते है। इस मौके पर ऋषिपाल सिंह, काशीराम भडाना, रामफल सिंह, जिले सिंह आर्य, गजे सिंह, योगेंद्र सिंह, बबलू, हरबीर सिंह, जयपाल सिंह, महेश कुमार, विकास व अंकुर आदि मौजूद रहे।
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नेट हाउस के जरिए कद्दुवर्गीय फसलों की पौध को बचाएं
दौराला। मार्च के पहले सप्ताह में बदलता मौसम किसानों की परेशानी बढ़ा सकता है। वर्तमान समय में कद्दुवर्गीय फसल की बुआई शुरू हो गई हैं। अगर ऐसे में बारिश हुई तो भारी नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग द्वारा 5 से 7 मार्च के बीच तेज बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। भविष्यवाणी को लेकर किसान चिंति हैं। अगर बारिश हुई तो पौध खेतों में नष्ट हो जाएगी और सब्जियों के दाम गर्मियों में आसमान छू सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जिस किसान ने पौध तैयार की है। वह लोटरनल (नेट हाउस) का प्रयोग कर बचा सकते है। इससे बारिश का पानी पौध तक नहीं पहुंचेगा। वहीं नेट हाउस के पास नालियां बना दें जिससे पानी की निकासी हो जाए। जिन खेतों में पौध की बुआई हो चुकी है। तो बारिश के बाद खेत में अवश्य यूरिया का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश से तोरी, लौकी, करेला, भिंडी, टमाटर, मिर्च सहित तेज हवा से गेहूं , सरसों की फसल को भी नुकसान हो सकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनंत ने बताया कि बारिश व ओलावृष्टि होने से कद्दुवर्गीय फसलों को सबसे अधिक नुकसान होगा। किसान तैयार की गई पौध को नेट हाऊस का इस्तेमाल कर बचा सकते है। साथ ही जल निकासी का भी उचित प्रबंध करना होगा।