इस प्रतियोगिता में 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 25 राज्यों के 4000 से अधिक खिलाड़ियों से भाग लिया। भरत सिंह के जज्बे और प्रदर्शन को देखकर युवा खिलाड़ी भी हैरत में पड़ गए। उन्होंने 30 जनवरी को लॉंग जंप और 31 जनवरी को ट्रिपल जंप में स्वर्ण पदक जीता।
दो फरवरी को उन्होंने 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। भरत सिंह ने पत्नी हर प्यारी देवी के निधन के अगले दिन ही बड़े बेटे साहब सिंह के साथ चैंपियनशिप की तैयारी शुरू कर दी। परिवार के सदस्यों ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने खेल पर ध्यान केंद्रित किया। उनका कहना है कि पत्नी के जाने का दुख असहनीय है लेकिन जीवन चक्र चलता रहता है।
बचपन से दौड़ने का शौक, रोजाना सात किमी दौड़ते हैं
भरत सिंह खेती के साथ सोने-चांदी का काम भी करते है। उन्हें बचपन से ही दौड़ने का शौक है। आज भी वे प्रतिदिन लगभग सात किलोमीटर दौड़ते हैं। इससे पहले भी उन्होंने वर्ष 2018-19 में आंध्र प्रदेश के गुन्टुर में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक जीते थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा जाहिर की है।