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एशियन गेम्स में खूब गरजी बंदूकें, दुनिया ने माना यूपी के निशानेबाजों का लोहा, देखें तस्वीरें 

Wed, 22 Aug 2018 05:28 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सौरभ चौधरी शूटर - फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूपी के बागपत के खिलाड़ियों की बंदूकें खूब गरजी हैं। पिछले दो दशक में यहां के खिलाड़ियों ने दुनिया भर में लोहा मनवाया। विवेक सिंह को अर्जुन अवार्ड और सीमा तोमर को लक्ष्मीबाई अवार्ड भी मिल चुका है। खिलाड़ियों की नई पौध भी छा जाने के लिए तैयार है।  
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रंग लाने लगी कोच की मेहनत

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कोच अमित श्योराण व शूटर सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
बिनौली के कोच अमित श्योराण की मेहनत रंग लाने लगी है। सौरभ चौधरी के पदक के बाद फिर से खेलों को लेकर युवाओं का रूझान बढ़ेगा। करीब बीस साल पहले जौहड़ी में रेंज की स्थापना की। एक से बढ़कर एक खिलाड़ी निकलें। यहीं से निकले अमित श्योराण ने बिनौली में शूटिंग रेंज खोली,इसके अलावा अन्य खिलाड़ियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में शूटिंग रेंज चलाई। बागपत के निशानेबाज विवेक सिंह को वर्ष 1999 में अर्जुन अवार्ड दिया। जौहड़ी की सीमा तोमर को रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड दिया जा चुका है। अमित श्योराण, जाकिर खान, फारूख अली, रवि जाटव समेत अन्य खिलाड़ियों ने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 
 
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दिग्गजों की हार से टूटी बागपत की उम्मीदें 

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सीमा तोमर बाएं - फोटो : अमर उजाला
एशियाई खेलों में शामिल होने गए दिग्गज खिलाड़ियों की हार से बागपत की उम्मीदें भी टूटी है। पहलवान संदीप तोमर को हार का सामना करना पड़ा। ट्रेप निशानेबाजी में सीमा तोमर हार गई। इसके अलावा ट्रेप में ही अखिल श्योराण की हार से खेल प्रेमी निराश दिखे। 

पदक विजेता रवि का भी बागपत से नाता 

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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ के पदक विजेता रवि कुमार का भी बागपत से नाता है। जौहड़ी में कोच डॉ राजपाल सिंह के नाती रवि कुमार ने यहीं से खेल शुरू किया था। पालेम बांग में सोना झटकने वाले सौरभ चौधरी की कामयाबी परीकथा जैसी है। सिर्फ तीन साल में किसान का बेटा गोल्डन ब्वाय बन गया। रोज 12 किमी का सफर टैंपु से करते हुए सौरभ कलीना से बिनौली तक जाता रहा और यहां आठ घंटे तक नियमित अभ्यास करता रहा।
 
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सौरभ चौधरी ने दुनिया में लहराया मेरठ का परचम

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सौरभ के गांव जश्न मनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
सौरभ के भाई नितिन चौधरी बताते हैं कलीना से कुछ किशोर रोजाना शूटिंग के लिए बिनौली जाते थे। मार्च 2015 में सौरभ चौधरी ने शूटिंग सीखने के इच्छा जताई। नितिन ने सौरभ का एडमिशन बिनौली करा दिया। रेंज पर पहली बार पिस्टल देखी। शुरूआत अभ्यास के बाद कोच अमित श्योराण ने सौरभ को अपनी पिस्टल से खेलने का अवसर दिया।
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