पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा और उनकी दादी कुंतीपाल से अरुण जेटली का काफी नजदीकी रिश्ता था। राघव लखनपाल शर्मा बताते हैं कि अरुण जेटली उनके संरक्षक, मार्गदर्शक और पिता समान थे। समय-समय पर सहारनपुर के विकास और यहां की राजनीतिक को लेकर वह सलाह दिया करते थे। वह जब दिल्ली जाते थे तो उनके निजी आवास पर हर बार उनसे मुलाकात होती थी।
दादी कुंती पाल का अरुण जेटली बहुत सम्मान करते थे। अपनी बेटी की शादी पर उन्होंने खासतौर से दादी कुंतीपाल को आमंत्रित किया था। दो सप्ताह में एक बार फोन पर उनकी दादी से बात होती थी।
2009 में जब वह अंतिम बार सहारनपुर आए थे तो उनका हेलीकॉप्टर पुलिस लाइन हैलीपैड पर उतरा था, उन्हें बेरीबाग में जनसभा को संबोधित करने जाना था, लेकिन सबसे पहले उन्होंने दादी कुंतीपाल के बारे में पूछा और उनसे मिलने के लिए दिल्ली रोड स्थित आवास पर पहुंचे। दादी से वार्ता करने के बाद वह चुनावी जनसभा को संबोधित करने गए थे।
वर्ष 1985 में वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व नगर महामंत्री कृष्ण लाल ठक्कर ने नगर पालिका चुनाव के दौरान नुमाइश कैंप से सभासद का चुनाव लड़ा था, तब वह 12 वोटों के अंतर से हार गए थे और उनके विरुद्घ चुनाव लड़ रहे श्याम लाल बाठला जीत गए थे।
कृष्ण लाल ठक्कर ने बताया कि तब दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में अरुण जेटली ने उनकी तरफ से विजयी हुए श्याम लाल बाठला के खिलाफ मुकदमा लड़ा था। क्योंकि, श्याम लाल बाठला बैंक कर्मचारी थे। इसलिए वह सरकारी पद पर होते हुए चुनाव नहीं लड़ सकते थे। अरुण जेटली ने तीस हजार कोर्ट के बाद हाईकोर्ट में पूरी मजबूती के साथ मुकदमा लड़ा था।