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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : साइबर अपराधियों का नया हथियार

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मेरठ। तकनीक के विकास के साथ साइबर अपराधियों के हथियार भी बदल रहे हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी डीपफेक और ऑटोमेटेड फिशिंग को अंजाम दे रहे हैं। पहले जहां साइबर ठगी के लिए मैन्युअल तरीके अपनाए जाते थे, वहीं अब एआई आधारित टूल से की जा रही है। इससे साइबर अपराधियों तक पहुंच पाना भी मुश्किल साबित हो रहा है।
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डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग
एआई की मदद से अब अपराधी किसी की आवाज या चेहरे को कॉपी कर उसके रिश्तेदारों या सहकर्मियों से पैसे ऐंठ रहे हैं। डीपफेक वीडियो और ऑडियो क्लोनिंग तकनीक के जरिए वे लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनके करीबी को पैसों की जरूरत है। हाल ही में सहारनपुर के अधिवक्ता सुरेश कुमार वर्मा से साइबर अपराधियों ने 1.49 लाख की ठगी की। एआई के जरिए उनके कनाडा में रहने वाले बेटे निखिल की आवाज में उनसे रुपये मांगे गए थे। बाद में पता चला कि यह एआई जनरेटेड वॉयस क्लोन था।

ऑटोमेटेड फिशिंग
पहले फिशिंग ईमेल में गलतियां होती थीं, जिन्हें पहचानना आसान था। लेकिन अब एआई टूल की मदद से साइबर अपराधी ग्रामर और टोन में परफेक्ट, पर्सनलाइज्ड मेसेज भेजते हैं। ये मेसेज किसी बैंक, सरकारी विभाग या कंपनी के ऑफिशियल कम्युनिकेशन जैसे लगते हैं और यूजर्स को लिंक पर क्लिक करने या पर्सनल डिटेल्स शेयर करने के लिए फंसाते हैं। कुछ दिन पूर्व परतापुर में एक ऑटोमोबाइल डीलर की फर्जी ईमेल आईडी बनाकर ठगी का प्रयास किया गया। हालांकि इसमें साइबर अपराधी सफल नहीं हो पाए।
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एआई-पावर्ड मालवेयर: सिस्टम को चुपके से करता है हैक
कुछ एडवांस्ड मालवेयर अब एआई का उपयोग करते हैं ताकि वे एंटीवायरस सॉफ्टवेयर को चकमा दे सकें। ये मालवेयर सिस्टम में घुसकर यूजर की आदतों को सीखते हैं और उसी के अनुसार अटैक करते हैं। कई बार ये डाटा चोरी करने के बाद खुद ही डिलीट हो जाते हैं, जिससे पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे बचें एआई-आधारित साइबर ठगी से
1. अनजान कॉल/मैसेज पर न दें प्रतिक्रिया : अगर कोई अचानक फोन करके पैसे मांगे, तो उस व्यक्ति से सीधे संपर्क करके पुष्टि करें।
2. लिंक पर क्लिक करने से पहले चेक करें : ईमेल या मेसेज में आए लिंक को हमेशा वेरिफाई करें। ऑफिशियल वेबसाइट पर सीधे जाकर चेक करें।
3. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग : अकाउंट सिक्योरिटी के लिए हमेशा 2एफए चालू रखें।
4. डीपफेक को पहचानें : वीडियो या आवाज में अजीब आर्टिफिशियल लुक/साउंड हो तो सतर्क हो जाएं।
5. एंटीवायरस और सिक्योरिटी अपडेट रखें : नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें।

एसपी क्राइम अवनीश कुमार का कहना है कि एआई जहां हमारे जीवन को आसान बना रहा है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए यह एक शक्तिशाली हथियार भी बन गया है। ऐसे में जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। ठगी होते ही तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं।
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