विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में मारे गए लोगों की याद में मंगलवार को सुबह शांति यज्ञ और शाम को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजली दी गई। अपनों की याद में पीड़ितों की आंखें भर आईं। घटना के 12 साल बाद भी इन पीड़ितों के चेहरों पर अपनों से बिछड़ने का गम साफ झलक रहा था।
10 अप्रैल 2006 को विक्टोरिया पार्क में आयोजित मेले में आग लग गई थी। इस अग्निकांड में 65 लोगों की मौत हो गई थी। करीब पौने दो सौ से ज्यादा लोग झुलस गए थे। इन में गंभीर रूप से झुलसे दर्जनभर से ज्यादा लोग आज भी अपंगता का दंश झेल रहे हैं। इन पीड़ितों ने न्याय के लिए कोर्ट में गुहार लगाई हुई है, जहां 10 सालों से लड़ाई चल रही है। इस दौरान इन्हें मुआवजा तो मिला, लेकिन इस घटना के जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं हुई। मंगलवार को मृतकों की याद में विक्टोरिया पार्क स्थित स्मारक पर शांति यज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, बार एसोसिएशन अध्यक्ष और विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत समिति के संरक्षक रोहिताश्व अग्रवाल, ज्ञानेंद्र शर्मा, सतीश चंद्र, राजीव गुप्ता, संजय गुप्ता, प्रतीक रस्तोगी, अपूर्व, अजय जायसवाल, आशीष, हर्ष, वैष्णवी, इसरार, अनुपम, नरेश तायल, राजीव, नलिन, विपिन, बब्बर, निशांत सेठी आदि मौजूद रहे। शाम को सभी पीड़ितों ने डीएम आवास के पास से विक्टोरिया पार्क तक कैंडल मार्च निकाला। सभी ने स्मारक पर मोमबत्ती जलाकर मृतकों को श्रद्धांजली दी।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की रही उपेक्षा
यज्ञ में जिलाधिकारी या उनके प्रतिनिधि के रूप में एडीएम सिटी या सिटी मजिस्ट्रेट आदि मौजूद रहते आये हैं, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी प्रशासन की पूरी तरह उपेक्षा रही। हालांकि इसके पीछे 10 अक्तूबर के बंद की अफवाह के बाद सुबह से ही सभी अधिकारियों का क्षेत्र में भ्रमण करना बताया गया। वहीं कैंडल मार्च में एक भी जनप्रतिनिधि ने उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। जबकि शहर में तीन विधायक, महापौर, सांसद के साथ ही दो राज्यसभा सदस्य भी हैं। यही नहीं सपा जिलाध्यक्ष को छोड़ दें तो अन्य किसी राजनीतिक दल के नेता या संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारी भी श्रद्धांजली देने नहीं पहुंचे।