कॉलेज प्रबंधन के पदाधिकारियों ने भी इनके प्रस्ताव को स्वीकार किया। तीनों ने स्कूल-कॉलेजों में जाकर ताइक्वांडो की ट्रेनिंग देनी शुरू की। दो छात्राएं हैं, लेकिन शालिनी दो बच्चों की मां हैं। अपने व्यस्त जीवन के बावजूद तीनों ताइक्वांडो ट्रेनिंग दे रही हैं। धीरे-धीरे इनका प्रयास रंग ला रहा है। कई स्कूलों ने छात्राओं को ताइक्वांडो सिखाने का इनसे आग्रह किया है। प्रदर्शन के दौरान ये छात्राओं को तलवारबाजी भी करके दिखाती हैं और टाइल्स आदि भी एक ही मुक्के के वार से तोड़ती हैं। इनमें शिवानी ताइक्वांडो में ब्लेक बैल्ट हैं। अक्तूबर माह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा मिशन साहसी का आयोजन किया गया था। छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जिले भर के स्कूल-कॉलेज में कैंप लगाए गए। इन कैंप में शालिनी, दीपिका और शिवानी ने छात्राओं को प्रशिक्षित किया। तीनों ने करीब पांच हजार छात्राओं को ताइक्वांडो के जरिए आत्मरक्षा के गुर सिखाए।
छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अगर कोई छींटाकशी करता है तो उसे तुरंत सबक सिखाना चाहिए।
-शालिनी, ताइक्वांडो ट्रेनर
छात्राओं के लिए छींटाकशी आम बात है। विरोध नहीं किया तो यह स्थिति और बिगड़ जाएगी। छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए खुद को मजबूत करना चाहिए।
-दीपिका, ताइक्वांडो ट्रेनर
ताइक्वांडो को स्कूल-कॉलेज के कोर्स में शामिल किया जाना चाहिए। सभी छात्राएं ताइक्वांडो, जूड़ो-कराटे सीख लें तो छेड़खानी की घटनाएं कम हो जाएंगी।
-शिवानी सिंह, ताइक्वांडो ट्रेनर
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