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अनियोजित विकास: डेढ़ लाख घरों के नहीं नक्शे पास  

Tue, 13 Mar 2018 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हाकिमों की लापरवाही का परिणाम यह रहा कि शहर का अनियोजित विकास हो गया। शहर में दो लाख से ज्यादा आवास हैं। लेकिन केवल 50 हजार भवनों के ही मानचित्र स्वीकृत हैं। विडंबना यह है कि महायोजना 2021 पर तीस प्रतिशत ही काम हो पाया और महायोजना 2031 बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।
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मेरठ महायोजना 2031 के बाबत एमडीए बोर्ड मीटिंग में भी प्रस्ताव पास हो चुका है। अहम यह है कि तीन साल बाद वर्तमान महायोजना समाप्त हो रही है। वर्ष 2006 में यह योजना अमल में आई थी। लेकिन अभी तक न तो इनर रिंग रोड बनी और न ही पूरे शहर में सीवरेज सिस्टम हुआ। दो सौ से ज्यादा अवैध कॉलोनी विकसित हो गईं। शहर की बात करें तो मेरठ शहर में लगभग दो लाख आवास हैं। इनमें 45 हजार आवासों के ही मानचित्र स्वीकृत हैं। हालांकि पचास हजार से ज्यादा आवास वह है जो पुराने शहर में है जो अब पूरी तरह से अनियोजित हैं। नई कालोनियां भी जो बनीं और नए आवास बनाए गए, उनमें भी अधिकतर में मानचित्र स्वीकृत ही नहीं किए गए। ऐसे में शहर पूरी तरह से अनियोजित ढंग से विकसित होता गया।

अब कर रहे कोशिश
नक्शों को ऑनलाइन स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद नक्शाें की स्वीकृति शुरू हुई है। अभी तक सवा दो सौ नक्शे स्वीकृत हुए हैं और मेरठ प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। बावजूद इसके शहर में ताबड़तोड़ ढंग से अवैध निर्माण हो रहे हैं।
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महायोजना 2021 में यह होना था काम
मास्टर प्लान 2021 में इनर रिंग बननी थी जो नहीं बनी। न ही आउटर रिंग रोड पर काम हुआ। न ही नए बस अड्डे बने और न ही शहर के अड्डे बाहर हुए। ट्रांसपोर्ट नगर शहर से शिफ्ट नहीं हो पाया। जुर्रानपुर फाटक पर फ्लाईओवर नहीं बना। न ही यहां से शताब्दीनगर को कनेक्ट करने वाली रोड बनी। उल्टे इस रोड के एलाइनमेंट पर अवैध कालोनी डेवलेप हो गई। चौराहाें पर सही तरीके से काम नहीं हुआ। टेंपो जोन अलग नहीं बने, जो यातायात के लिए सबसे बड़े नासूर बने हैं। इंडस्ट्रियल एरिया बना। लेकिन यहां विकास ही नहीं हुआ। जल निकासी न होने के कारण यहां खाली प्लाटों में पानी भरा है, जो जी का जंजाल बना है।

नई योजना में बढ़ेगा क्षेत्र
नई योजना में मवाना, सरधना तथा हस्तिनापुर क्षेत्र भी शामिल होगा। लोगों का कहना है कि केवल शुल्क वसूली के लिए ही यह योजना लागू करने की तैयारी है। विकास तो कुछ होगा नहीं और न ही एमडीए कोई सुविधा देगा।

दौराला महायोजना ने भी दम तोड़ा
दौराला क्षेत्र के 31 गांवों को जोड़ने के लिए दौराला महायोजना बनी थी, जो दम तोड़ गई। इस योजना को बनाने में ही गड़बड़झाला हुआ और शासन ने सभी अभियंताओं तथा प्लानरों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

रेट्रोफिटिंग भी नहीं हो पाई
शहर स्मार्ट कैसे बनता, जब पुराने भवनों का सही तरीके से सर्वे ही नहीं हो पाया। शासन ने कहा था कि शहर में नए भवन तो भूकंप रोधी बने हीं, साथ-साथ पुरानों भवनों का भी सर्वे हो। खासतौर पर लाइफलाइन कहे जाने वाली शहर की इमारतों का रैपिड विजुअल सर्वे कर रेट्रोफिटिंग की जाए। एमडीए ने इस बाबत योजना तैयार की तो पसीने छूट गए। शहर में दो लाख भवन हैं, जिनमें से मात्र 50 हजार के ही मानचित्र स्वीकृत हैं। ऐसे में डेढ़ लाख मकानों का सर्वे कैसे किया जाए। कहां से इतने कर्मचारी लाए जाएं। 

फिर से करेंगे कोशिश
एक बार फिर एमडीए तैयारी करने की बात कह रहा है कि सर्वे होगा। लेकिन शासन से बात कर किश्तों में काम होगा। अन्य विभागों को भी साथ लेकर टीमें बनानी होंगी।

एमडीए दिखा रही सख्ती
अब नक्शे स्वीकृत करने शुरू किए हैं। जो बिना नक्शे के निर्माण कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है। इस बाबत एमडीए सख्ती दिखा  रहा है। हम नक्शा स्वीकृति में प्रदेश में दूसरे स्थान पर आ गए हैं। अवैध कालोनियों पर भी एक्शन करेंगे। -साहब सिंह, वीसी एमडीए
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