पलटवार में भाई का मर्डर
अनिल तिहरे हत्याकांड में जनवरी 2012 में पकड़ा गया। वह जेल से अपने गैंग को चलाने लगा। रणदीप भाटी और अमित कसाना मदद करते थे। वह जेल से ही मर्डर और रंगदारी की साजिशों को अंजाम देने लगा। सुंदर भाटी गैंग ने जनवरी 2014 दुजाना के घर पर हमला कर दिया। ताबड़तोड़ फायरिंग में उसके भाई जय भगवान की मौत हो गई। अनिल के पिता ने सुंदर भाटी समेत आठ को नामजद कराया।
#WATCH उत्तर प्रदेश: यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में गैंगस्टर अनिल दुजाना मारा गया। वीडियो घटनास्थल से है। pic.twitter.com/PwH5aqlZ27
— ANI_HindiNews (@AHindinews)
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दुजाना गैंग ने इसका बदला लेने के लिए सुंदर के गुर्गे राहुल का मर्डर कर दिया। दुजाना के गुर्गों ने जनवरी 2019 को दिल्ली के नंद नगरी के कारोबारी से 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। वह 9 साल बाद जनवरी 2021 में जमानत पर बाहर आया। 16 अक्टूबर 2021 में सिकंदराबाद के एक कारोबारी से एक करोड़ की रंगदारी मांगी। खेड़ी गांव के प्रधान जयचंद हत्याकांड में गवाह उनकी पत्नी को भी धमकाया। वह दोनों केसों में वॉन्टेड चल रहा था।
अनिल दुजाना एक शातिर किस्म का अपराधी था, जो अपने गैंग के सदस्यों की रंजिश एवं उनके आर्थिक लाभ को ध्यान में रखकर अपना गैंग चलाता था। वह लगातार गैंग में नये सदस्य जोड़ता रहता है और अन्य गैंग के साथ मिलकर भी अपराध करता था।
अपने प्रतिद्वंदी एवं आर्थिक लाभ के लिए नृशंस हत्याएं कराता था। इसका मुख्य जुड़ाव रणदीप भाटी निवासी रिठारी गैंग से था। साथ ही मुकीम काला गैंग और इसके सदस्यों से भी अनिल दुजाना की घनिष्ठता रही। शुरुआती रूप से अपराध में यह रणदीप भाटी गैंग के लिए हत्याएं करता था लेकिन बाद में अपना खुद का मजबूत गैंग बना लिया। इसके बाद अन्य गैंग के साथ भी गठजोड़ कर लिया। अपराधी अनिल दुजाना को मुकदमा सं. 267/12 धारा 174 भादवि के अभियोग में माननीय न्यायालय द्वारा चार साल की सजा सुनाई गई थी।