हत्यारोपी अर्पित, अंगदवीर की फाइल फोटो, मां गुरप्रीत और दादी बलजिंदर कौर।
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ के बहसूमा में छह साल के मासूम अंगदवीर की हत्या के बाद आरोपी अर्पित पाराशर ने अपनी प्रेमिका यानी अंगदवीर की मां गुरप्रीत कौर को व्हाट्सएप कॉल किया था। इस पूरी साजिश में गुरप्रीत हिस्सेदार थी या नहीं, इसके लिए पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। दोनों की कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्य की भी जांच की जा रही है।
अंगदवीर की दादी को संभालती महिलाएं।
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सीओ मवाना पंकज लवानिया ने बताया कि गुरप्रीत कौर को हिरासत में लेकर बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी पूछताछ जारी रही। वहीं मुख्य आरोपी बैंक मैनेजर अर्पित पाराशर को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस पूछताछ में हत्यारोपी अर्पित पाराशर पुत्र लक्ष्मेंद्र ने बताया कि मंगलवार दोपहर को वह घर के बाहर खेल रहे अंगदवीर को अपनी कार में बहला-फुसलाकर ले गया था। हस्तिनापुर के सती आशा देवी मठ मंदिर के पास वन क्षेत्र में ले जाकर उसने पहले मासूम का गला रेता और फिर दोनों हाथों की नसें काट दीं। यहां अंगदवीर ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
छह महीने वाली शादी का झूठ भी बेनकाब
आरोपी अर्पित ने पहले पुलिस को बताया था कि उसकी शादी 6 महीने पहले हुई थी लेकिन पुलिस ने जब उसकी कुंडली खंगाली तो एक और झूठ सामने आ गया। अर्पित की शादी वर्ष 2022 में मुजफ्फरनगर के शाहपुर गांव की गौरी से हुई थी। पिछले दो साल से उसकी पत्नी मायके में रह रही है और दोनों का कोई बच्चा नहीं है। पुलिस अब इस मामले में अर्पित की पत्नी गौरी के भी बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है ताकि अर्पित के आपराधिक इतिहास और चाल-चलन का पता लगाया जा सके।
मेरा लाल मिट्टी हो गया अम्मा... नम आंखों से अंगदवीर को अंतिम विदाई
बृहस्पतिवार को रामराज श्मशान घाट का मंजर देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। पोस्टमार्टम के बाद जब मासूम अंगदवीर का शव रामराज पहुंचा तो कोहराम मच गया। जब अर्थी उठी तो पूरा गांव बिलख पड़ा। रामराज नहर पुल के पास गमगीन माहौल में मासूम का अंतिम संस्कार किया गया।
जब पिता गुरसेवक सिंह ने कांपते हाथों से अपने इकलौते बेटे की चिता को मुखाग्नि दी, तो दादी बलजिंदर कौर चीख मारकर बेहोश हो गईं। होश में आने पर वे रोते हुए बोलीं -हाय मेरा लाल मिट्टी हो गया, मेरा अंगद, अब मैं किसके लिए जिऊं...।
घटना की सूचना मिलते ही राज्यमंत्री दिनेश खटीक पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित दादी बलजिंदर कौर को गले लगाकर ढांढस बंधाया और कहा कि सरकार और प्रशासन पूरी मजबूती के साथ आपके साथ खड़ा है। इस मासूम की हत्या अत्यंत निंदनीय और जघन्य है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हम इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलवाकर आरोपियों को फांसी की सजा दिलाएंगे।
इस दौरान उनके साथ पूर्व मंत्री सरदार अमृतपाल सिंह, मोनू बंसल, विपिन मनचंदा और सुदर्शन गोयल भी मौजूद रहे। मृतक अंगदवीर के घर जमा हुए ग्रामीणों ने भी आक्रोश जताते हुए कहा कि ऐसे आरोपियों को जब तक फांसी नहीं होगी, तब तक किसी और अंगद का बचपन सुरक्षित नहीं रहेगा।
दादी बोलीं- मेरे पोते को खा गई
70 वर्षीय बलजिंदर कौर बदहवास हैं और उनके टूटे घर से अब सिर्फ सिसकियों की आवाजें आ रही हैं। आंसुओं से भीगी आवाज में उन्होंने कहा, मेरा बेटा गुरसेवक सऊदी अरब में खून-पसीना बहाकर पैसे कमा रहा है। वह फोन पर कहता था-अम्मा, मैं विदेश रहता हूं, मेरे अंगद को मां मिल जाएगी। मैंने अपनी बहू को बहुत समझाया पर उसने मेरे बेटे के भरोसे का ही गला काट दिया और मेरे पोते को खा गई। जब अंगद गायब हुआ तो वह मेरे पास आई। उसकी आंख में एक आंसू नहीं था और चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। भगवान ऐसी मां किसी को न दे। बलजिंदर कौर ने रोते हुए बताया कि अंगद अक्सर उनसे पूछता था-दादी, पापा कब आएंगे? जब मैं कहती कि पापा पैसे कमाने गए हैं तो वह धीरे से कहता था दादी, मां भी तो चली गई... वो कब आएगी?
तंत्र-मंत्र और बलि की भी आशंका
अंगदवीर की इस बेरहम हत्या में अब तंत्र-मंत्र और तांत्रिक क्रिया का साया भी मंडराने लगा है। मृतक की दादी बलजिंदर कौर ने आशंका जताई है कि यह तांत्रिक क्रिया या बलि का मामला हो सकता है। उन्होंने बताया कि हमारे पंजाबी सिख परिवार की रीत है कि बच्चों के बाल नहीं काटे जाते, विशेषकर पहले बच्चे के। मना करने के बावजूद गुरप्रीत ने अंगद के बाल कटवा दिए थे। अब लगता है कि वह कोई टोटका था।
बलजिंदर कौर का सबसे बड़ा शक हत्या के तरीके पर है। उनका कहना है कि अगर अर्पित को सिर्फ मारना ही था तो वह गोली मार देता या गला दबा देता और शव कहीं भी फेंक देता। लेकिन उसने बेरहमी से गला रेतकर पूरा खून बहाया और हाथों की नसें भी काटीं। शव को सती आशा देवी मठ मंदिर के पास झाड़ियों में फेंकना भी संदेह पैदा करता है। ग्रामीणों का भी मानना है कि बलि देने वाले अक्सर मंदिर के आसपास ही ऐसी वारदात करते हैं।
ये बोले सीओ
मवाना के क्षेत्राधिकारी (सीओ) पंकज लवानिया ने कहा कि तंत्र-मंत्र की क्रिया के चक्कर में हत्या होने की बात बिल्कुल गलत है। आरोपी अर्पित पाराशर का उस जंगली इलाके और रास्ते से पहले से परिचय था, वह उस जगह को अच्छे से जानता था। इसीलिए उसने पकड़े जाने के डर से हत्या के बाद शव को छिपाने के उद्देश्य से वहां फेंका था। पुलिस मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच कर रही है।
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