फलावदा। अमरोली उर्फ बड़ा गांव में हर साल की तरह इस साल भी शोहदा-ए करबला के चेहल्लुम के उनवान से सफर की 24 तारीख को हजरत अब्बास का अलम और जियारत बरामद हुआ। अलम और जियारत का जुलूस इमामबाड़ा से बरामद होकर बड़ी मस्जिद के दरवाजे से होकर देर शाम वक्फ करबला में जाकर संपन्न हुआ।
मरसियाख्वानी सैयद चांद रजा रिजवी साहब और सैयद शारिब रिजवी साहब ने की। मेमन सादात से आए मौलाना सैयद शेर अली साहब ने फरमाया कि जो अपने वक्त के इमाम को पहचाने बगैर मर गया तो वो जहालत की मौत मर गया। नौहाख्वानी रहबर अब्बास, फरहान रिजवी, गुड्डू, अंजुमन ए फरोगे अजा महलका और शाहम अब्बास, शहजाद अंजुमन हुसैनी बातनौर ने मातमपुर्सी की।
इस मौके पर सैयद मोहिब रिजवी, सैयद मोहम्मद हादी, सैयद अली मिस्बाह एडवोकेट, वाहिद अली, जैनब, मुंतजिर, मुदस्सिर, तबान, तम्मर, मुबाशिर, अली मसूद, नायाब प्रधान, शहंशाह जफर, मोहम्मद हसन, जावेद, मशाहिद, खुर्रम, समर अब्बास, मेराज आदि थे।