रविता और अमरदीप को दोषी करार देने में पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. कपिल गर्ग समेत अन्य गवाहों के बयान अहम साबित हुए। डिजिटल साक्ष्यों में दोनों की सीडीआर और मोबाइल लोकेशन ने भी वारदात की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हत्या की रात 12 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल की सुबह गिरफ्तारी से पहले तक दोनों ने 51 बार मोबाइल पर बात की थी।
डॉ. कपिल गर्ग ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने 13 अप्रैल 2025 को शाम 5:45 से 6:30 बजे तक अमित के शव का पोस्टमार्टम किया था। चेहरे पर ऑक्सीजन की कमी से हल्का नीलापन, आंखें बंद व कंजस्टेड और हाथों के नाखून नीले थे। चेहरे व नाक की बायीं ओर, निचले होंठ और दोनों एड़ियों पर खरोंच के निशान थे। गर्दन के दाहिने हिस्से पर चोट थी। त्वचा खोलने पर सूजन और खून के थक्के मिले।
डॉक्टर के मुताबिक थायरॉइड कार्टिलेज के दोनों सुपीरियर कॉर्न और हॉयॉइड कॉर्न टूटे हुए थे। मौत गला तथा नाक-मुंह दबाने से दम घुटने के कारण हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जबरन गला घोंटने पर ही ये हड्डियां टूटती हैं। चोटों से अमित के मौत से पहले संघर्ष करने की पुष्टि हुई।
भाई बोला- संबंधों का विरोध करने पर हुई हत्या
प्राथमिकी दर्ज कराने वाले अमित के भाई मोनू कश्यप ने बताया कि अमित और अमरदीप दोनों टाइल्स लगाने का काम करते थे और एक-दूसरे के घर आते-जाते थे। इसी दौरान उनकी नजदीकी बढ़ी। रविता और अमरदीप के संबंधों की जानकारी होने पर अमित विरोध करने लगा, जिसके बाद दोनों ने उसकी हत्या कर दी। मोनू ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।
हत्या से पहले पति के साथ शाकंभरी देवी के दर्शन
12 अप्रैल को अमित और रविता शाकंभरी देवी मंदिर दर्शन करने गए थे। अभियोजन के मुताबिक रविता और अमरदीप पहले ही अमित की हत्या की साजिश रच चुके थे। अमरदीप ने शाम को सांप का इंतजाम किया और उसे अकबरपुर सादात गांव के बाहर थैले में बंद कर झाड़ियों में छिपा दिया। रविता ने रात में अमित और सास मुनेश देवी को खाने में नींद की गोली दी। मुनेश देवी पहले से कुछ दवाएं लेती थीं इसलिए उन पर नींद की गोलियों का अधिक असर नहीं हुआ और उनकी नींद खुल गई।
703 बार फोन पर हुई बात
एडीजीसी के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारियों के बयान और कोर्ट में पेश सीडीआर से दोनों के संबंधों की पुष्टि हुई। सीडीआर के अनुसार 18 जनवरी 2025 से 13 अप्रैल 2025 तक 86 दिनों में रविता और अमरदीप के बीच 703 बार फोन पर बातचीत हुई। रविता ने बचाव में कहा कि जिस मोबाइल में अमरदीप की बातचीत का रिकॉर्ड मिला वह उसका पति अमित इस्तेमाल करता था लेकिन यह दावा अदालत में नहीं टिक सका।