राजस्थान व हरियाणा के कांवड़ियों के जत्थों से गूंजा कांवड़ मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
कांवड़ यात्रा के लिए की गई बैरिकेडिंग, सलावा, सरधना और नानू पुल सील
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना (मेरठ)। श्रावण मास के शुभारंभ से एक दिन पहले बुधवार को सरधना क्षेत्र में कांवड़ यात्रा का उत्साह चरम पर रहा। उमस और बारिश की बौछारों के बीच चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग और गंगनहर पटरी से हजारों शिवभक्त गंगाजल से भरी कांवड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। बोल बम, हर-हर महादेव और जय शिव शंकर के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया। पूरे दिन कांवड़ियों के जत्थों का आवागमन जारी रहा।
इस बार गंगनहर पटरी मार्ग पर राजस्थान और हरियाणा के शिवभक्तों की संख्या अधिक दिखाई दी। अलवर और जोधपुर से आए श्रद्धालु देवीशंकर, बालेश्वर सिंह, आकाशवेद और ईश्वरपाल ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। केवल कोरोना महामारी के दौरान दो वर्षों तक यात्रा नहीं कर सके। वह दिवंगत आत्माओं की शांति, गांव की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने जा रहे हैं। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर भी कांवड़ लेकर निकले हैं।
गंगनहर पटरी मार्ग और प्रमुख पुलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार कांवड़ मार्ग पर गश्त कर रही हैं तथा शिविरों का निरीक्षण कर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं।
गंगनहर पटरी मार्ग पर वाहनों का आवागमन बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है। बुधवार से सलावा, सरधना और नानू गंगनहर पुल सहित प्रमुख प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ केवल कांवड़ियों और ड्यूटी में लगे वाहनों को ही मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। कांवड़ मार्ग पर लगातार बढ़ रही शिवभक्तों की संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बैरिकेडिंग के माध्यम से भारी और हल्के वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजा जा रहा है। उप जिलाधिकारी उदित नारायण सेंगर, क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी के साथ कांवड़ मार्ग का निरीक्षण किया।
गंगनहर पटरी मार्ग पर जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने कांवड़ियों से निर्धारित मार्ग का पालन करने और वाहन चालकों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा समाप्त होने तक यातायात व्यवस्था में आवश्यकतानुसार बदलाव किया जाएगा। मार्ग पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी पूरी कर ली गई है।
उधर, रोहटा क्षेत्र में पूठ गंगनहर पुल पर दिनभर कांवड़ियों का भारी जमावड़ा लगा रहा। गंगोत्री, यमुनोत्री, गोमुख, हरिद्वार और ऋषिकेश से जल लेकर राजस्थान और हरियाणा की ओर जा रहे शिवभक्तों के जत्थे लगातार चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग से गुजरते रहे। डूंगर, जटपुरा, पूठखास, भलसोना, भोला सहित कई गांवों में सेवा शिविर तैयार किए जा रहे हैं, जहां स्थानीय ग्रामीण और स्वयंसेवी संगठन भोजन, दवा, विश्राम और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। रोहटा थाना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी शिविरों का निरीक्षण कर सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।
मां के स्वास्थ्य के लिए ला रहे कांवड़
राजस्थान के अलवर निवासी जनेश्वर पाल ने बताया कि वह 24 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपनी यात्रा पर निकले हैं। वह अपनी माता सुकर्मा देवी के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए कांवड़ ला रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान भोलेनाथ का नाम लेते हुए कठिन से कठिन यात्रा भी सरल प्रतीत होती है। कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति और सामाजिक एकता का भी संदेश देती है।
सरधना। चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग से जल लेकर गुजरते शिवभक्त। संवाद
सरधना। चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग से जल लेकर गुजरते शिवभक्त। संवाद